



पुलिस की ड्यूटी के साथ नि:शुल्क शिक्षा दे रहीं थानाध्यक्ष, पढ़ाई के साथ कॉपी-किताब और भविष्य की राह भी दिखा रहीं
पटना / मसौढ़ी :
“मैं लहसुना गांव की रहने वाली हूं। पापा मसौढ़ी के एक दुकान में काम करते हैं। हम गरीब हैं, तीन भाई-बहन हैं। मां स्कूल में झाड़ू-पोछा करती हैं। ऐसे में थाने में मैडम रोज पढ़ाती हैं और कॉपी-कलम भी देती हैं। साथ ही फ्यूचर के बारे में भी बताती हैं।” यह शब्द हैं 5वीं कक्षा की छात्रा मुन्नी कुमारी के, जिनके लिए लहसुना थाने की थानाध्यक्ष खुशबू खातून न सिर्फ एक पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि उनकी “वर्दी वाली दीदी” और जीवन की मार्गदर्शक भी हैं।
2018 बैच की दारोगा, शिक्षा की अलख जगा रहीं
खुशबू खातून बिहार पुलिस की 2018 बैच की अधिकारी हैं। वे अपने पद की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ गरीब और वंचित बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा भी दे रही हैं। रोजाना शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक थाने में कक्षा लगती है, जिसमें करीब 20-30 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं।
शिक्षिका बनने का था सपना
खुशबू बताती हैं कि उन्हें बचपन से पढ़ाने का शौक था और वे शिक्षिका बनना चाहती थीं। पुलिस सेवा में आने के बाद भी उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। पहले पांच बच्चों से शुरू हुई कक्षा आज एक सशक्त अभियान बन चुकी है। वे बच्चों को सिर्फ किताबें ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें आगे जीवन में क्या करना है, यह भी समझाती हैं।
नर्सरी से कक्षा 5 तक पढ़ाई, कॉपी-किताब भी देती हैं
थानाध्यक्ष खुशबू खातून नर्सरी से लेकर कक्षा पांच तक के बच्चों को सभी विषय पढ़ाती हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वे कॉपी, किताब और पेन जैसी आवश्यक चीजें भी खुद देती हैं। त्योहारों के अवसर पर बच्चों को उपहार भी देती हैं, जिससे उनके चेहरे खिल उठते हैं।
बच्चों की बातें, सपनों की उड़ान

लहसुना गांव की बुलबुल कुमारी, नैना कुमारी, गुड़िया, रिया, शीलू और पंकज जैसे कई बच्चों ने कहा कि दीदी बहुत अच्छे से पढ़ाती हैं और हमें बहुत प्यार करती हैं। बुलबुल कुमारी बताती हैं कि उनके पिता राज मिस्त्री हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। ऐसे में मैडम ही उनकी उम्मीद बनकर सामने आई हैं।
रिया कुमारी कहती हैं कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। पापा एक दुकान में काम करते हैं। वह भी पुलिस में जाकर दीदी की तरह देश की सेवा करना चाहती हैं।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
बच्चों के अभिभावक प्रमोद कुमार और धर्मवीर भारती ने बताया कि खुशबू खातून की यह पहल बहुत सराहनीय है। उनके पास इतना पैसा नहीं कि बच्चों को ट्यूशन भेज सकें, लेकिन थाने में पढ़ाई से बच्चों का भविष्य बदल रहा है।
ड्यूटी के साथ शिक्षा की जिम्मेदारी

थाने की व्यस्तता के बावजूद खुशबू बच्चों की पढ़ाई में कोई कोताही नहीं करतीं। सुबह ड्यूटी होने पर शाम में कक्षा लगती है और अगर नाइट ड्यूटी होती है तो सुबह बच्चों को पढ़ाती हैं।
पिता का सपना कर रही हैं पूरा
खुशबू खातून के पिता मोहम्मद शाहिद एक किसान हैं और उनकी हमेशा यह इच्छा रही कि बेटियां समाज सेवा में आगे रहें। खुशबू तीन बहनों और दो भाइयों में एक हैं। उनकी एक बहन शिक्षिका और दूसरी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।
सामाजिक पहल बनी मिसाल
पूर्व प्रमुख रामाकांत रंजन किशोर ने कहा कि खुशबू खातून की पहल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। जब पुलिस सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाती है तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।
खुशबू खातून की यह पहल न केवल पुलिस की मानवीय छवि को मजबूती देती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि एक वर्दीधारी अधिकारी भी समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरणा बन सकती है।













