



11 फरवरी को मनाया जाएगा एमडीए मेगा अभियान, कैंप लगाकर कराया जाएगा दवा सेवन, स्वास्थ्य मंत्री करेंगे राज्य स्तरीय उद्घाटन
जिले में 10 फरवरी से लगभग 34, 81,000 लाभार्थियों को खिलाई जायेंगी फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं
भागलपुर । फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए जिला भर में 10 फरवरी, 2026 से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के सफल किर्यान्वयन के लिए 07 फरवरी को सीफार के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मॉडल हॉस्पिटल भागलपुर के सभागार में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ अशोक प्रसाद ने बताया कि 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमे बूथ लगा कर समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन कराएंगे। इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये, चक्कर जैसे लक्षण होते हैं तो यह शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद मर रहें हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान यदि किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है तो उससे निपटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डीभीबीडीसीओ डॉक्टर दीनानाथ ने मीडिया सहयोगियों के साथ संवाद करते हुए बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम में भागलपुर जिला के लगभग 34,81,000 लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डीईसी एवं अल्बेंडाज़ोल कि निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने खिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि दवाओं का वितरण बिलकुल भी नहीं किया जायेगा। इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। मीडिया सहयोगियों से अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने समाचार पत्रों और चैनल के माध्यम से लोगों तक इस प्रकार संदेश पहुंचाएं कि प्रत्येक लाभार्थी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही सुनिश्चित करें और इस कार्यक्रम में उनका पूर्ण सहयोग करें। वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी (भीडीसीओ) आरती कुमारी ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया,दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है।

फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे: हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर व्यक्ति लगातार 5 साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेता है तो पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी वीडीसीओ कृति कुमारी, जिला जनसंपर्क कार्यालय के अधिकारी, मीडिया सहयोगी के साथ सीफार के जय प्रकाश कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के जिला स्तरीय प्रतिनिधि और जिला फाइलेरिया कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
















