



भागलपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में 2400 मेगावाट क्षमता वाले अत्याधुनिक विद्युत उत्पादन संयंत्र का शिलान्यास किया। इस परियोजना को लेकर जहाँ सरकार और स्थानीय प्रशासन इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं इलाके की जनता में आक्रोश और असंतोष की लहर भी देखने को मिल रही है।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि मात्र एक रुपये वार्षिक दर पर सरकार ने अदानी समूह को जमीन 33 साल के लिए दे दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनता की जमीन को सस्ते दामों पर निजी हाथों में सौंपने जैसा है। इसके साथ ही, परियोजना के लिए लगभग 10 लाख पेड़ काटे जाने की योजना है, जिस पर लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार एक पेड़ माँ के नाम लगाने की बात करती है और राज्य सरकार बेटी के जन्म पर पेड़ लगाने का नारा देती है, तो इस स्तर पर बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई विरोधाभासी कदम है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास होना जरूरी है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर नहीं। कई किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

वहीं, कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि जनता की जमीन को जबरन कब्जा किया जा रहा है और विकास के नाम पर छल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को पर्यावरण संरक्षण और किसानों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
पूर्व विधायक रामविलास पासवान ने भी इस मामले में जनता के साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने लोगों की बातों को अनसुना किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।













