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नवगछिया अनुमंडल के रंगरा प्रखंड में बाढ़ की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। प्रखंड क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन पंचायत पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। इसके अलावा क्षेत्र के लगभग 10 सरकारी विद्यालय भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिसके कारण इन विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है।

बाढ़ प्रभावित विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं, इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समीपवर्ती सुरक्षित विद्यालयों में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। अचानक विद्यालय बंद होने से छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

प्रखंड की मदरौनी और सधुआ चापर पंचायत सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित हैं। इन इलाकों में पानी का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। प्रभावित परिवार अपने माल-मवेशियों के साथ एनएच-31 किनारे और कटरिया रेलवे स्टेशन के आसपास की रेलवे पटरियों पर झोपड़ियां बनाकर शरण लिए हुए हैं।

दुख की बात यह है कि इन बाढ़ पीड़ितों को अब तक किसी प्रकार की राहत सुविधा प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्थानीय प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि बाढ़ग्रस्त गांवों में दर्जन भर नावों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि धरातल पर एक भी नाव नजर नहीं आ रही है।

बाढ़ प्रभावित लोगों को अपने आवश्यक कार्यों और दैनिक जीवन के लिए जान जोखिम में डालकर पानी पार करना पड़ रहा है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे भूखे-प्यासे जीवन बिता रहे हैं। राहत और बचाव कार्यों के अभाव में इन परिवारों की स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है।

प्रशासनिक उपेक्षा और अव्यवस्था के कारण बाढ़ से त्रस्त लोग न केवल भौतिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद पीड़ित हैं। ऐसे में अविलंब राहत कार्य शुरू किया जाना अति आवश्यक है, ताकि प्रभावित लोगों को इस आपदा की घड़ी में कुछ राहत मिल सके।

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