



भागलपुर। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा में अब केवल कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में भागलपुर और आसपास के इलाकों में मूर्तिकार मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हालांकि इस बार कड़ाके की ठंड और लगातार धूप की कमी ने उनकी कठिनाइयों को काफी बढ़ा दिया है।

मूर्तिकारों का कहना है कि पर्याप्त धूप नहीं मिलने के कारण प्रतिमाओं को सुखाने में काफी समय लग रहा है। नमी बने रहने से मूर्ति की मजबूती और बनावट पर असर पड़ता है, जिससे उन्हें बार-बार मरम्मत और अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद मूर्तिकार समय पर सुंदर और आकर्षक प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हुए हैं।

इस बीच एक सकारात्मक पहल भी देखने को मिल रही है। इस वर्ष भागलपुर में सरस्वती प्रतिमाओं को रंगने के लिए इको फ्रेंडली रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। ये रंग पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं और पूजा के बाद विसर्जन के दौरान तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों को नुकसान नहीं पहुंचाते।

मूर्तिकारों का कहना है कि परंपरा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए वे इस बार अधिक से अधिक पर्यावरण हितैषी सामग्री का उपयोग कर रहे हैं।
मूर्तिकार निर्मल कुमार पंडित ने बताया कि ठंड और धूप की कमी के बावजूद सभी कारीगर पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुंदर और सुरक्षित प्रतिमाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकें।

सरस्वती पूजा को लेकर बाजारों में भी धीरे-धीरे रौनक बढ़ने लगी है और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बना हुआ है।














