



भागलपुर। भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक को जन-जन तक पहुँचाने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भागलपुर के प्रसिद्ध कथक गुरु निभाष मोदी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्षों से कला-साधना में रत निभाष मोदी न केवल कथक की शास्त्रीय परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं को नृत्य के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक चेतना की दिशा भी प्रदान कर रहे हैं।

निभाष मोदी भागलपुर के साथ-साथ नवगछिया, पूर्णिया, पटना सहित बिहार के कई जिलों में कथक नृत्य का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों विद्यार्थियों ने कथक नृत्य की विधिवत शिक्षा प्राप्त की है। इनमें से कई विद्यार्थी आज विभिन्न सरकारी विभागों में सेवा दे रहे हैं और अपनी कला-साधना को उपलब्धि और व्यक्तित्व विकास का आधार मानते हैं।

सिर्फ मंचीय प्रस्तुति तक सीमित न रहते हुए, निभाष मोदी लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। कथक पर आधारित उनकी बहुप्रतीक्षित पुस्तक “कथक : योग व साधना” शीघ्र ही पाठकों के लिए उपलब्ध होने जा रही है। यह पुस्तक कथक को केवल नृत्य शैली के रूप में नहीं, बल्कि योग, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में प्रस्तुत करती है। कला विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी।
अपने उत्कृष्ट कला योगदान और समाज में सांस्कृतिक चेतना जागृत करने के लिए निभाष मोदी को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें शास्त्रीय नृत्य कथक फेलोशिप सम्मान, बाबा साहब अंबेडकर–फुले फेलोशिप सम्मान, कला कोविद सम्मान, कलाश्री सम्मान, चक्रवर्ती देवी स्मृति सम्मान और डॉ. चतुर्भुज सम्मान शामिल हैं।
निभाष मोदी अब तक जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। उनकी प्रस्तुतियों में कथक की परंपरागत गरिमा के साथ आधुनिक भावबोध का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जिसे दर्शकों और कला समीक्षकों ने भरपूर सराहा है। उनका मानना है कि जब युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ती है, तब समाज सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है। उनके निरंतर प्रयासों से कथक नृत्य आज केवल मंचीय कला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजगार, व्यक्तित्व निर्माण और आत्मिक विकास का प्रभावशाली माध्यम बनता जा रहा है।

कथक गुरु निभाष मोदी की पुस्तक “कथक : योग व साधना” भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक को गहन साधना और जीवन दर्शन के रूप में प्रस्तुत करती है। पुस्तक में कथक के मूल तत्व—ताल, लय, भाव, गति और अंग संचालन—को योग की दृष्टि से समझाया गया है। लेखक बताते हैं कि कथक की प्रत्येक मुद्रा, प्रत्येक चक्कर और प्रत्येक पग संचालन केवल तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि श्वास-प्रश्वास और मानसिक एकाग्रता से जुड़ी एक साधना है।
पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि कथक का नियमित अभ्यास योगासन की तरह शरीर को सुदृढ़ बनाता है और ध्यान की तरह मन को स्थिर करता है। घुंघरुओं की ध्वनि, ताल की निरंतरता और भावों की अभिव्यक्ति साधक को वर्तमान क्षण में स्थापित करती है। यह प्रक्रिया तनाव, मानसिक अशांति और असंतुलन को दूर करने में सहायक होती है, जिससे कथक एक संपूर्ण योग पद्धति बनकर उभरता है।
निभाष मोदी ने गुरु-शिष्य परंपरा, साधक का अनुशासन, आत्मसंयम और श्रद्धा पर विशेष जोर देते हुए पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक न केवल कथक के विद्यार्थियों, गुरुओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण ग्रंथ साबित होगी।
कुल मिलाकर, “कथक : योग व साधना” नृत्य को आत्मिक जागरण और जीवन साधना के रूप में प्रस्तुत करती है। यह कृति भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और कला के प्रति प्रेरित करने का कार्य करती है।












