


भागलपुर/नवगछिया।
बिहार सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई पिंक बस सेवा नवगछिया–भागलपुर–पूर्णिया मार्ग पर अपनी मूल मंशा से भटकती नजर आ रही है। जिस योजना को महिलाओं के लिए सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक यात्रा के उद्देश्य से लागू किया गया था, वही योजना अब लापरवाही और मनमानी का शिकार होती दिख रही है। हालात यह हैं कि महिलाओं के लिए आरक्षित पिंक बसों में खुलेआम पुरुष यात्रियों को बैठाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा संचालित पिंक बस भागलपुर से खुलकर नवगछिया होते हुए पूर्णिया जाती है और वहीं से पुनः नवगछिया के रास्ते भागलपुर लौटती है। इस पूरे रूट पर बस संचालन के दौरान कई बार यह देखा गया है कि चालक और कंडक्टर द्वारा पुरुष यात्रियों को बिना किसी रोक-टोक के बस में सवार कराया जा रहा है, जबकि यह सेवा विशेष रूप से महिलाओं के लिए निर्धारित है।
आज मंगलवार की दोपहर लगभग 12:30 बजे नवगछिया के मकनपुर चौक (एनएच 31) के पास स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई। भागलपुर की ओर जा रही पिंक बस में पुरुष यात्री ही अधिक संख्या में बैठे पाए गए, जबकि महिलाओं की संख्या महज एक या दो ही थी। यह दृश्य अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर शुरू की गई यह योजना जमीनी स्तर पर किस तरह मजाक बनकर रह गई है।
पिंक बस सेवा की शुरुआत महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि वे बिना किसी भय के अपने कार्यस्थल, शिक्षा संस्थान या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा कर सकें। लेकिन जब उन्हीं बसों में पुरुष यात्रियों की भरमार होगी, तो महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित वातावरण कैसे सुनिश्चित होगा, यह बड़ा सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस में पुरुषों की सवारी होने से महिलाएं असहज महसूस करती हैं और कई बार वे पिंक बस का उपयोग करने से ही बचने लगती हैं। इससे न केवल योजना का उद्देश्य विफल हो रहा है, बल्कि सरकारी संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है। चालक और कंडक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जो नियमों की अनदेखी कर पुरुष यात्रियों को बस में बैठा रहे हैं।
यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी की कमी को भी उजागर करती है। यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पिंक बस सेवा महिलाओं के लिए सुविधा के बजाय एक दिखावटी योजना बनकर रह जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना को गंभीरता से लागू करने की जरूरत है, ताकि सड़क पर इसकी गरिमा बनी रहे और महिलाएं वास्तव में सुरक्षित महसूस कर सकें।
आवश्यक है कि परिवहन विभाग इस मामले में तत्काल संज्ञान ले, नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे और पिंक बसों को वास्तव में महिलाओं के लिए आरक्षित सेवा के रूप में संचालित करे। तभी महिलाओं के नाम पर चलाई जा रही योजनाएं सार्थक साबित होंगी, अन्यथा सड़क पर इनका बंटाधार होना तय है।













