


भागलपुर के सुविख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ,चर्चित समाजसेवी एवं जीवन जागृति समिति के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार की क्लीनिक में उस समय एक अजीब दृश्य देखने को मिला जब वे मरीजों की जांच करते हुए अचानक गले में 12 फीट लंबा साँप लपेटे नज़र आए।
क्लीनिक में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्टाफ सदस्य कुछ पलों के लिए स्तब्ध रह गए। कुछ ने डर के मारे क्लीनिक से बाहर भागने की कोशिश की, तो कुछ हक्का-बक्का डॉक्टर को ही देखने लगे। मगर डॉ. अजय कुमार बिना किसी घबराहट के उसी गले में लिपटे साँप के साथ आराम से मरीजों को न सिर्फ देख रहे थे, बल्कि सर्पदंश और उससे जुड़ी सावधानियों पर विस्तार से जानकारी भी दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि अक्सर लोग साँप के काटने के बाद घबरा जाते हैं और झाड़-फूंक या ओझा-सोखा के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और जान पर बन आती है।
करीब पंद्रह मिनट तक साँप गले में लपेटे रहने के बाद जब माहौल पूरी तरह गंभीर हो गया, तब डॉ. अजय कुमार ने मुस्कराते हुए रहस्य से पर्दा हटाया और बताया कि यह साँप असली नहीं, बल्कि कपड़े से बना एक खिलौना है।
डॉ. कुमार ने कहा कि उन्होंने यह सब एक विशेष जागरूकता अभियान के तहत किया, ताकि लोग समझ सकें कि डर के बजाय सूझबूझ और वैज्ञानिक इलाज ही सर्पदंश से बचाव का सही रास्ता है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी को साँप काटे, तो सबसे पहले मरीज को स्थिर रखें, घबराएं नहीं और बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक, गंडा-तावीज या देरी जानलेवा हो सकती है।
डॉ. अजय कुमार की इस अनोखी पहल ने क्लीनिक में आए सभी मरीजों और उनके परिजनों को न सिर्फ चौंका दिया, बल्कि उन्हें एक जरूरी और जीवन रक्षक संदेश भी दे गया। उनके इस प्रयोगात्मक जागरूकता अभियान की हर ओर सराहना हो रही है।












