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भागलपुर । जिले के पीरपैंती प्रखंड के बाकरपुर गांव में सोमवार को एक अनोखी बारात निकली, जहां दूल्हा देवमुनी कुमार ने लग्जरी कार की बजाय नाव पर सवार होकर बारात निकाली। बाकरपुर गांव दो सप्ताह से गंगा नदी में आई बाढ़ से पूरी तरह जलमग्न है। ऐसे में गांव से बाहर निकलने का एकमात्र साधन नाव ही बचा था।

दूल्हे के पिता रामदेव मंडल ने बताया कि बेटे की शादी की तिथि एक महीने पहले तय कर दी गई थी। इस बीच गंगा में भीषण बाढ़ आ गई और पूरा गांव चारों ओर से पानी से घिर गया। ऐसे में कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड स्थित कटाकोष गांव में रहने वाले रामचंद्र चौधरी के यहां बारात नाव से ही भेजी गई और शादी के बाद दुल्हन को लेकर नाव से ही लौटना पड़ा।

दूल्हे देवमुनी कुमार ने बताया कि गांव से कुछ दूर तक वे स्कॉर्पियो से गए, फिर पैदल चलते हुए गंगा किनारे पहुंचे। वहां से नाव पर सवार होकर बारात के साथ दुल्हन के घर पहुंचे। घर से निकलते समय मौसम साफ था, लेकिन नाव पर चढ़ते ही बारिश शुरू हो गई। झमाझम बारिश के बीच भीगते हुए वे बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचे।

देवमुनी ने बताया कि यदि बाढ़ नहीं आई होती तो बारात सड़क मार्ग से जाती। लेकिन मजबूरी में नाव का सहारा लेना पड़ा। बारात में करीब 25 से 30 लोग शामिल थे। दोपहर 12 बजे घर से निकली बारात रात करीब 8 बजे दुल्हन के घर पहुंची। सीधा रास्ता 35 किलोमीटर का था, लेकिन गंगा नदी पार करने और पैदल रास्ते तय करने के कारण समय अधिक लगा।

उन्होंने बताया कि गांव से लगभग 8 किलोमीटर दूर गंगा नदी है। वहां कोई घाट नहीं है, इसलिए खेत किनारे नाव बुक कर खड़ी करवाई गई थी। वहां तक पैदल गए, फिर नाव से पार हुए। नदी के पार एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद ई-रिक्शा से दुल्हन के घर पहुंचे।

इस दौरान कोई बैंड-बाजा या धूमधाम नहीं हो सकी। देवमुनी कुमार ने कहा, “मेरा सपना था कि शादी धूमधाम से हो, लेकिन बाढ़ ने सब चौपट कर दिया। दिल में कसक रह गई।”

शादी के बाद ससुराल से मिला सारा सामान—पलंग, गद्दा, तकिया, कुर्सी-टेबल, गोदरेज आदि भी नाव पर लादकर ही घर लाया गया। दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को नाव पर देखकर लोगों की भीड़ जमा हो गई और गांववाले इस अनोखी बारात को देखकर हैरान रह गए।

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