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नवगछिया प्रखंड के पकड़ा ग्राम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तत्वाधान में नमामि गंगे के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन एवं जलज परियोजना के अंतर्गत विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जलज परियोजना के सहायक समन्वयक राहुल कुमार राज ने कार्यक्रम में उपस्थित समुदाय को बताया कि विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस हर वर्ष 4 दिसंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्वभर में बढ़ते शिकार, अवैध व्यापार, आवास विनाश और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण संकटग्रस्त हो रहे वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। यदि वन्यजीव नष्ट होने लगें, तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगता है।

कार्यक्रम में बताया गया कि आज दुनिया के अनेक प्राणी जैसे बाघ, गैंडा, हाथी, तेंदुआ, कछुए और व्हेल आदि विलुप्ति के कगार पर हैं। इसका मुख्य कारण अवैध शिकार, अवैध वन्यजीव व्यापार, वन कटाई और जलवायु परिवर्तन है। इस समस्या के समाधान के लिए केवल सरकारों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम जनता की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के जलज परियोजना के सहायक समन्वयक कौस्तुभ वर्मा ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है। हर जीव का इस धरती पर समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि हमें वन्यजीवों का संरक्षण करके अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करना चाहिए। इसके लिए जंगलों को सुरक्षित रखना, अवैध शिकार पर रोक लगाना, वन्यजीवों के आवासों को संरक्षित करना और लोगों में जागरूकता फैलाना आवश्यक है।

अंत में कार्यक्रम में शामिल सभी समुदाय ने जैव विविधता संरक्षण और जलीय जीवों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए शपथ ली। आयोजकों ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा = मानव जाति की रक्षा है। जब तक वन्यजीव सुरक्षित हैं, तभी तक पृथ्वी स्वस्थ और जीवंत रह सकती है।

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