



शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद आपने सामाजिक और धार्मिक कार्यों में जो योगदान दिया, वह हम सभी युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्पद और सम्माननीय रहेगा, भैय्या जी।
कोविड के कठिन समय में हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार करवाना हो, काढ़ा बनवाकर बाँटना हो, सामाजिक समरसता पर चर्चा करनी हो या बैठकों में सशक्त रूप से अपनी बात रखनी हो—हर पल आपने अपनी निःस्वार्थ भावना और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। दुर्गा मइया मंदिर में सेवा शिविर हो, गुरु पूर्णिमा की तैयारी, या ठाकुर प्रभु दरबार से यात्राओं का आयोजन—हर अवसर पर आपका सान्निध्य हम सभी को मिला।

विशेष रूप से पिछले 7-8 वर्षों में मुझे आपके करीब रहने का सौभाग्य मिला। आज जब आप हमारे बीच नहीं हैं, ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोई दिव्य, ऊर्जा से भरपूर आत्मा हमसे विदा ले चुकी है। आप उन विरले महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद मन और आत्मा से विशाल और दयालु जीवन जिया।
आपकी कमी हर क्षण महसूस होगी। आपके विचार, आपका स्नेह और आपका मार्गदर्शन हमेशा हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा।

सादर नमन, विनम्र श्रद्धांजलि। 🕉️🙏🏻
द्वारा : सनातन सेवा समिति, गुरु ग्राम,नगरह,नवगछिया ।













