



भागलपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में देश में लगाए गए आपातकाल की याद में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जेपी सेनानी मंच के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसका विषय था—‘आपातकाल: लोकतंत्र पर संकट और वर्तमान संदर्भ’। इसमें 1975 में लागू किए गए आपातकाल के प्रभावों और आज की राजनीतिक परिस्थिति के बीच तुलना की गई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं समाजसेवी प्रकाश चंद्र गुप्ता ने की। उन्होंने इस आयोजन को लोकतांत्रिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि जेपी आंदोलन की प्रेरणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी।

वक्ताओं ने 1975 के आपातकाल को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए युवाओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहें। जेपी सेनानियों ने अपने अनुभव साझा किए और आपातकाल के दौरान झेले गए उत्पीड़न व संघर्ष की यादें ताजा कीं।
संगोष्ठी में प्रमुख रूप से संजय सिंह, जेपी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. फारूक अली सहित कई बुद्धिजीवी, समाजसेवी और राजनेता उपस्थित रहे।














