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नवगछिया के भवानीपुर थाना क्षेत्र के मधुरापुर जहाज घाट पर सोमवार की दोपहर दर्दनाक हादसे में दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान नारायणपुर पछियारी टोला निवासी 15 वर्षीय मो. दिलशाद पिता मो. निसार और मधेपुरा जिला के फुलौत थाना अंतर्गत निवासी 10 वर्षीय मो. अरमान पिता मो. कुर्शीद के रूप में हुई है। दोनों ममेरे-फुफेरे भाई बताए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, दोपहर लगभग 1 बजे दोनों किशोर स्नान करने मधुरापुर जहाज घाट पहुंचे थे। स्नान के दौरान वे घाट से कुछ ही दूरी पर उस स्थान पर चले गए, जहां पूर्व में जेसीबी मशीन से अवैध रूप से बालू निकालने के कारण लगभग 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया था। दोनों किशोर तैरना नहीं जानते थे और गहरे पानी में चले जाने से डूब गए।

चीख-पुकार सुनकर घाट पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को पानी से बाहर निकाला और इलाज के लिए नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गम और आक्रोश से भरे परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया । लोगों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।

सूचना मिलते ही भवानीपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल नवगछिया भेजा।

इस हादसे के बाद मृतक दिलशाद के घर में कोहराम मच गया। उसकी मां गुड़िया देवी, भाई-बहन और परिजन दहाड़ मारकर रोते रहे। बताया गया कि दिलशाद दो भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़ा था और सातवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके पिता मो. निसार शारीरिक रूप से विकलांग हैं और सड़क किनारे चदरा का बक्सा बनाने का काम करते हैं।

वहीं, अरमान कुछ दिन पहले ही मोहर्रम के मौके पर अपनी मां राजो देवी के साथ ननिहाल आया था। उसके पिता परदेश में मजदूरी करते हैं। अरमान दो भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था और चौथी कक्षा का छात्र था।

नारायणपुर अंचलाधिकारी विशाल अग्रवाल ने बताया कि दोनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। उन्हें आपदा राहत कोष से नियमानुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

अवैध बालू खनन बना जानलेवा, हर साल दोहराया जाता है हादसा

मधुरापुर जहाज घाट के पास वर्षों से उजले बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। स्थानीय बालू माफिया प्रशासन और कानून की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में गंगा से बालू निकालते हैं, जिससे 20 से 30 फीट तक गहरे खतरनाक गड्ढे बन जाते हैं। यहां स्नान करने आने वाले लोगों को इन गड्ढों की जानकारी नहीं होती, जिससे हर साल डूबने की घटनाएं हो रही हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी नवगछिया और खरीक के चार छात्र जल भरने के क्रम में ऐसे ही गड्ढों में डूबकर मौत के शिकार हो गए थे। उस समय भी अवैध खनन को लेकर भारी बवाल हुआ था, लेकिन बालू माफियाओं पर प्रशासन का कोई कठोर कदम नहीं दिखा। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद अब तक अवैध खनन पर अंकुश नहीं लगाया गया है।

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