



सुलतानगंज। श्रावणी मेला 2025 की शुरुआत होते ही सुलतानगंज में श्रद्धा और भक्ति की लहर दौड़ पड़ी है। उत्तरवाहिनी गंगा तट से बाबा भोलेनाथ के भक्तों का सैलाब गंगाजल भरकर बाबाधाम देवघर की ओर निकल पड़ा है। चारों ओर ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंज रहे हैं। कांवरिया पथ पूरी तरह शिवभक्ति में डूब चुका है।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सुलतानगंज से गंगाजल लेकर बाबाधाम तक कांवरियों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। कोई डाक बम बनकर दौड़ते हुए जा रहा है, कोई नंगे पांव पैदल कांवर लेकर चला है, तो कोई दंड प्रणाम यात्रा कर रहा है।
लेकिन इस बार कांवरिया पथ पर एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। कई कांवरिये आंखों पर पट्टी बांधकर पूरी यात्रा कर रहे हैं। यह कोई सामान्य संकल्प नहीं, बल्कि गहरी आस्था और बाबा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। इन भक्तों में झारखंड के पलामू जिले से विनोद अग्रवाल, बिहार के खगड़िया से सुधांशु कुमार, दरभंगा के महेंद्र प्रजापति और सीवान से राजेंद्र यादव शामिल हैं।
ये सभी भक्त रविवार को अपने-अपने जत्थों के साथ सुलतानगंज से गंगाजल लेकर देवघर के लिए रवाना हुए। इन श्रद्धालुओं की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है और हाथों में कांवर है। साथ में कुछ सहयोगी भी हैं जो रास्ते की जानकारी देते हुए उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

संकल्प की शक्ति और मन्नत की पूर्ति
दरभंगा से आए महेंद्र प्रजापति ने बताया कि बाबा भोलेनाथ ने उनकी अरजी सुन ली, उनकी मन्नत पूरी हो गई। उन्होंने प्रण लिया था कि अगर बाबा उनकी इच्छा पूरी कर देंगे, तो वे आंखों पर पट्टी बांधकर बाबाधाम की यात्रा करेंगे। महेंद्र अब आंखें बंद कर कांवरिया पथ पर चल रहे हैं। उनका कहना है कि यह संकल्प आसान नहीं है, लेकिन मन में बाबा का नाम और श्रद्धा हो तो कोई रास्ता मुश्किल नहीं होता।
पट्टी तभी खुलेगी जब देखेंगे पंचशूल
इन भक्तों ने बताया कि वे बाबाधाम पहुंचने के बाद सबसे पहले बाबा के दरबार में पंचशूल का दर्शन करेंगे और तभी अपनी आंखों से पट्टी खोलेंगे। तब तक उनकी आंखें बंद रहेंगी। यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक आंतरिक साधना है।
देश के लिए दुआ, बाबा से अरज
पलामू से आए विनोद अग्रवाल ने बताया कि देश में हाल ही में कई दर्दनाक घटनाएं हुईं — बालटाल में हादसा, अहमदाबाद में विमान दुर्घटना और केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश में सैकड़ों लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं से मन आहत हुआ। इसी पीड़ा के साथ वे बाबा के दरबार जा रहे हैं, ताकि देश में सुख-शांति और सुरक्षा बनी रहे। उन्होंने कहा कि उनकी मन्नत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देशवासियों की सलामती के लिए है।
श्रद्धा का नया रूप और प्रशासन का सहयोग
श्रावणी मेला में भक्तों की यह विशेष यात्रा श्रद्धा का एक नया रूप है। कांवरियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और हर वर्ष भक्त अपनी भक्ति को अलग रूप देकर प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से कांवरियों को सुरक्षित यात्रा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल और विश्राम की सुविधा कांवरिया पथ पर सुनिश्चित की गई है।
श्रावणी मेला 2025 में भक्तों का यह संकल्प, आस्था और विश्वास यह दर्शाता है कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति भी है। आंखों पर पट्टी बांधकर कांवर लेकर चलने वाले ये भक्त एक अद्वितीय उदाहरण हैं, जिन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि बाबा के प्रति सच्ची श्रद्धा में कोई बाधा आड़े नहीं आती।













