


नवगछिया के मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित हुआ कार्यक्रम

नवगछिया : प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय शाखा, प्रोफेसर कॉलोनी, नवगछिया द्वारा बुधवार को मारवाड़ी विवाह भवन नवगछिया में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को राजयोग के माध्यम से मानसिक शांति, स्वस्थ जीवन और आत्मविकास के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराना था। यह आयोजन स्व- उन्नति के लिए आयोजित राजयोग भट्टी का हिस्सा था, जो सुबह 9:00 बजे से लेकर संध्या 3:00 बजे तक चला।
कार्यक्रम में लगभग 150 क्षेत्रीय भाई-बहनों ने भाग लिया। राजयोग के महत्व को समझाने और जीवन जीने की कला को सिखाने के लिए प्रमुख अतिथि के रूप में टाटानगर, जमशेदपुर सेवा केंद्र से आईं ब्रह्मकुमारी अंजू दीदी ने मुख्य प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ईश्वरीय संदेश के माध्यम से जीवन की सच्ची शांति, स्वस्थ रहने की कला और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के तरीके पर विस्तृत चर्चा की।
भागलपुर सेवा केंद्र से राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी अनीता दीदी ने भी अपने सत्र में जीवन को खुशहाल बनाने के सरल उपाय साझा किए। उन्होंने बताया कि जीवन में आत्म-निर्भरता और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए राजयोग कितना प्रभावी हो सकता है।
नवगछिया सेवा केंद्र की इंचार्ज, बीके निर्मला बहन ने भी अपने विचार साझा करते हुए नवगछिया सेंटर पर राजयोग का साप्ताहिक क्लास आयोजित करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे और शाम 5:00 से 6:00 बजे तक राजयोग का प्रशिक्षण दिया जाता है, जो सभी के लिए निशुल्क होता है।

यह कार्यक्रम न केवल आत्मज्ञान की ओर एक कदम बढ़ाने का अवसर था, बल्कि यहां आए हुए लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाओं और अनुभवों को भी साझा किया। कई उपस्थित लोग इस प्रशिक्षण के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करने की उम्मीद जताते हुए यह भी कहते दिखे कि इस तरह के सत्र से मानसिक तनाव और शारीरिक विकारों में काफी राहत मिल सकती है।
लोगों ने बताया कि राजयोग के माध्यम से वे अब अपने जीवन को नई दिशा देने में सक्षम महसूस कर रहे हैं और उन्हें आत्मशांति प्राप्त हो रही है। कई भाई-बहनों ने यह भी कहा कि ऐसे सत्रों से न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि समाज में भी एक सामूहिक शांति का वातावरण उत्पन्न होता है।
इस कार्यक्रम का आयोजन नवगछिया के लोगों के लिए एक प्रेरणा बनकर आया, जिससे वे जीवन को और अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने के लिए प्रेरित हुए।













