



नवगछिया : सावन मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र के समस्त ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में उल्लास और उमंग के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। सावन की पूर्णिमा रक्षाबंधन पर भाई-बहन के इस प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक यह पर्व परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार धूमधाम से मनाया गया।
सुबह से ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी में जुट गई थीं। घर-घर में पूजा की थाली सजाई गई। थालियों में राखी, अक्षत, रोली, दीपक और मिठाइयाँ रखी गईं। जैसे ही शुभ मुहूर्त आया, बहनों ने भाइयों को तिलक कर रक्षा सूत्र बांधा और उनके दीर्घायु एवं सुखद जीवन की कामना की। भाईयों ने भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।

इस अवसर पर प्राचीन काल से प्रचलित रक्षा सूत्र मंत्र भी पढ़ा गया, जो इस पर्व की गरिमा को और भी आध्यात्मिक बनाता है।
“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् अनुपद्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”
इस श्लोक का अर्थ है – जिस रक्षा सूत्र से महाबली दानवों के राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूँ। हे रक्षा, तुम स्थिर रहो, विचलित न हो।

नगर के मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और मोहल्लों में भी बच्चों और युवाओं के बीच रक्षाबंधन का विशेष उत्साह देखा गया। स्कूलों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी इस पर्व पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों को भाई-बहन के प्रेम और रक्षाबंधन के महत्व के विषय में बताया गया।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थानीय प्रशासन ने बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की थी, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।













