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भागलपुर : भागलपुर जिले में इन दिनों श्रद्धा और आस्था का सबसे बड़ा लोकपर्व बिशहरी पूजा पूरे उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व को विषहरी पूजा या बिहुला-विषहरी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व नागों की देवी मां मनसा को समर्पित होता है, जिन्हें लोक परंपरा में “सांपों की देवी” माना जाता है।

बिशहरी पूजा अंग प्रदेश की प्रसिद्ध लोककथा बिहुला-बाला से जुड़ी हुई है। यह पूजा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि मां मनसा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और विशेष रूप से सर्पदंश से रक्षा होती है।

इस अवसर पर भागलपुर में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय कलाकार और सांस्कृतिक समूह इसमें भाग लेते हैं। बिहुला की वह अमर कथा, जिसमें उसने अपने मृत पति बाला लखिंदर को पुनर्जीवित करने के लिए मां मनसा से संघर्ष किया था, इस पर्व का प्रमुख आकर्षण रहती है। यह कथा नारी सशक्तिकरण और अदम्य संकल्प का प्रतीक भी मानी जाती है।

स्थानीय लोगों, सांस्कृतिक संगठनों और समाजसेवियों की ओर से अब यह मांग उठने लगी है कि बिशहरी पूजा को राजकीय मेला का दर्जा दिया जाए। उनका मानना है कि इससे इस पारंपरिक विरासत को और भव्य रूप में संरक्षित किया जा सकेगा और नई पीढ़ियों तक इसकी सांस्कृतिक गूंज पहुंच सकेगी।

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