



भागलपुर ।
खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादा नशीन मौलाना सैयद शाह फख़रे आलम हसन ने कहा कि हदीस-ए-नबवी की सबसे प्रामाणिक और विश्वसनीय किताब बुखारी शरीफ है। उन्होंने हाल ही में उज़्बेकिस्तान यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अल्लाह तआला के फज़ल से उन्हें ख़ुरासान और मावरा-उन-नहर की उस पवित्र सरज़मीन की ज़ियारत का अवसर प्राप्त हुआ, जो सदियों से इल्म और रूहानियत का केंद्र रही है।
उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्हें समरकंद के पास स्थित ख़रतंग में हज़रत इमाम मोहम्मद बिन इस्माईल बुखारी रहमतुल्लाह अलैह के पवित्र मज़ार पर हाज़िरी का सौभाग्य मिला। हज़रत इमाम बुखारी का रौज़ा मुबारक एक महान आध्यात्मिक केंद्र है। इसके पास ही उज़्बेकिस्तान सरकार की निगरानी में “मस्जिद इमाम बुखारी” का निर्माण अंतिम चरण में है। इस भव्य मस्जिद में एक साथ दस हज़ार नमाज़ी नमाज़ अदा कर सकते हैं। मस्जिद परिसर लगभग तीन सौ एकड़ में फैला है, जहाँ ज़ायरीनों के लिए ठहरने और अन्य सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है।

इसी परिसर में एक शोध केंद्र भी स्थापित है, जहाँ इमाम बुखारी की इल्मी सेवाओं पर शोध कार्य किया जा रहा है। छात्रों के लिए रहने और पढ़ाई की बेहतरीन व्यवस्था है। साथ ही इमाम बुखारी म्यूज़ियम भी है, जहाँ बुखारी शरीफ के पुराने नुस्ख़े, ऐतिहासिक पांडुलिपियाँ और दुर्लभ मुसहफ़-ए-उस्मानी (कुरआन का प्राचीन हस्तलिखित संस्करण) संरक्षित है। मौलाना ने बताया कि इस नायाब नुस्ख़े की ज़ियारत उनके लिए रूहानी अनुभव रहा।
उन्होंने आगे कहा कि मस्जिद और शिक्षण संस्थानों के चारों ओर फैली हरियाली, सलीके से लगाए गए पेड़-पौधे और बाग़-बग़ीचे इस्लाम के सफाई और व्यवस्थापन के उसूलों का बेहतरीन उदाहरण हैं। इस पूरे वातावरण में एक ऐसी रूहानी खिंचाव महसूस होती है कि दिल चाहता है वहीं रुककर इस आध्यात्मिक माहौल से लाभ उठाया जाए।
मौलाना सैयद शाह फख़रे आलम हसन ने बताया कि उन्हें बुख़ारा की यात्रा का भी अवसर मिला, जो इमाम बुखारी का वतन है। वहाँ उन्होंने उनके निवास स्थान और उस प्राचीन मस्जिद की ज़ियारत की, जहाँ इमाम बुखारी के समय में भी नमाज़ अदा होती थी। उन्होंने कहा कि बुख़ारा की फ़िज़ा में रूहानियत और ईमान की खुशबू आज भी महसूस की जा सकती है।
अंत में उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनकी रूहानी ज़िंदगी का सुनहरा अध्याय है। इससे यह यक़ीन और भी मजबूत हुआ कि किसी भी देश या समाज को प्रगति की राह पर ले जाने के लिए उसे ज्ञान, संस्कृति और पवित्रता से जोड़ना आवश्यक है।














