



नवगछिया । ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ (एमआरएमए) अभियान के अंतर्गत तसर रेशम धागाकरण एवं कताई पर केंद्रित एक दिवसीय तकनीकी प्रदर्शनी कार्यक्रम सोमवार को जगदीशपुर प्रखंड के पुरैनी गांव में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम रेशम तकनीकी सेवा केंद्र, भागलपुर द्वारा महाप्रबंधक सह सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) एवं जिला नोडल अधिकारी, एमआरएमए के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कुल 31 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण तसर रेशम की रीलिंग एवं कताई की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन रहा, जिसे प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक देखा और सीखा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रेशम तकनीकी सेवा केंद्र, भागलपुर के वैज्ञानिक-बी आकाश शर्मा ने एमआरएमए अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह अभियान रेशम उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों को आत्मनिर्भर बनाने और कोसोत्तर (पोस्ट-कॉकून) प्रौद्योगिकियों में मशीनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

उन्होंने कार्यक्रम के दौरान बुनियाद रीलिंग मशीन और मोटराइज्ड स्पिनिंग मशीन की सहायता से उन्नत तसर रेशम धागे के उत्पादन की प्रक्रिया को तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया। उन्होंने दोनों मशीनों की कार्यप्रणाली, प्रमुख घटकों तथा संचालन विधियों का भी समग्र अवलोकन प्रस्तुत किया।
वहीं, वैज्ञानिक-सी त्रिपुरारी चौधरी ने ‘सिल्क समग्र’ योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी। उन्होंने पारंपरिक रीलिंग विधियों की तुलना में मशीनीकृत रीलिंग को अधिक प्रभावी बताते हुए इसके प्रयोग के लिए प्रतिभागियों को प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक मशीनों के उपयोग से उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ समय और श्रम की बचत होती है।

अपनी प्रस्तुति में उन्होंने तसर रेशम से तैयार होने वाले विभिन्न प्रकार के धागों की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला, जिससे प्रतिभागियों को तकनीकी समझ के साथ बाज़ार की मांग के अनुरूप धागा तैयार करने की प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने इस तकनीकी पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोज़गार को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। प्रदर्शनी के अंत में प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया तथा भविष्य में इस प्रकार की और कार्यशालाओं के आयोजन की मांग की।












