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अष्टमी के दिन ही लगाया जाता है विशेष भोग

नवगछिया। रक्तबलि की परंपरा से अलग, गोपालपुर प्रखंड के डुमरिया गांव की शक्ति स्वरूपा मैया भगवती को हलुआ-पुरी का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त अपनी मनौती रखकर मां को हलुआ-पुरी का भोग लगाता है, उसकी इच्छाएं शीघ्र ही पूरी होती हैं।

डुमरिया गांव, जो रंगरा और गोपालपुर प्रखंड की सीमा पर स्थित है, महाअष्टमी के दिन विशेष रूप से श्रद्धा का केंद्र बन जाता है। यहां हलुआ-पुरी का भोग ही मुख्य प्रसाद माना जाता है। कहा जाता है कि स्थापना के महज एक वर्ष के भीतर ही इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी। आज पास-पड़ोस के गांवों के अलावा निकटवर्ती जिलों से भी हजारों भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं।

यहां की परंपरा के अनुसार, छाग बलि (बकरे की बलि) नहीं दी जाती। भक्तगण केवल हलुआ-पुरी का भोग अर्पित कर मां को प्रसन्न करते हैं। सबसे पहले पूजा समिति की ओर से भोग चढ़ाया जाता है, उसके बाद श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रसाद मां को अर्पित किया जाता है। अष्टमी के दिन सुबह से ही भोग लगाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।

डुमरिया में मां भगवती की स्थापना का इतिहास भी बेहद रोचक है। प्रारंभ में जब भूमि उपलब्ध नहीं थी, तब प्रथम पूजन के अवसर पर मां की प्रतिमा को मध्य विद्यालय डुमरिया के प्रांगण में स्थापित किया गया था। बाद में मां की चमत्कारिक अनुभूतियों से प्रभावित होकर बाबूलाल मंडल, सीताराम मंडल, रुस्तम मंडल और राजकिशोर मंडल ने अपनी जमीन दान दी। इसी स्थान पर मां की प्रतिमा स्थापित की गई और हर वर्ष यहीं पूजा होती है। निकट भविष्य में यहां एक भव्य मंदिर निर्माण की योजना भी बनाई जा रही है।

महाअष्टमी की रात यहां भक्ति जागरण का आयोजन भी किया जाता है। इस कार्यक्रम में स्थानीय और नामचीन भजन गायक-गायिकाएं अपनी प्रस्तुतियों से भक्तों को भक्ति रस में डुबो देते हैं। इस बार जागरण कार्यक्रम का संचालन अंग संस्कृति लोकमंच, डुमरिया गोपालपुर, भागलपुर के द्वारा किया जा रहा है।

पूजा और मेले के सफल संचालन के लिए विशेष पूजा समिति का गठन किया गया है। अध्यक्ष बमबम मंडल, उपाध्यक्ष रामप्रसाद मंडल, सचिव चंद्रहास मंडल सहित पुटुश मंडल, संजीव मंडल, मोनू कुमार, लुखारी मंडल, बीपी मंडल, रितेश कुमार, अनिल मंडल, संतोष मंडल और नीतीश कुमार इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पूरे डुमरिया गांव के लोग इस आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग करते हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय रहता है। गोपालपुर पुलिस बल यहां 24 घंटे तैनात रहता है, ताकि मेले और पूजा में किसी प्रकार की बाधा न आए। मां भगवती की यह अनूठी परंपरा और भक्ति भाव पूरे क्षेत्र की आस्था का प्रतीक बन चुकी है।

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