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भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रतीक, आधुनिक भारत के महान शिल्पकार, किसान हितैषी एवं भारत रत्न ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में श्रद्धा, गरिमा और उत्साहपूर्वक मनाया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने सरदार पटेल के अदम्य साहस, अटूट संकल्प, दृढ़ नेतृत्व और दूरदृष्टि को नमन किया — जिन्होंने स्वतंत्र भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के स्वप्न को साकार किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक अनुसंधान, डॉ. अनिल कुमार सिंह (भा.कृ.से.) ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि “सरदार पटेल केवल भारत के लौह पुरुष नहीं थे, बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मा के प्रतीक थे। उनका विश्वास था कि राष्ट्र की मजबूती गांवों की समृद्धि और किसानों की आत्मनिर्भरता से ही संभव है। उन्होंने कृषि को केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार बताया।”

उन्होंने आगे कहा कि “आज जब देश जलवायु परिवर्तन, संसाधन प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सरदार पटेल का यह विचार कि ‘भारत का भविष्य उसके गांवों में बसता है’, पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर इसी दर्शन को आत्मसात करते हुए कृषि नवाचार, जलवायु-स्मार्ट तकनीक, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और स्टार्टअप प्रोत्साहन के माध्यम से कृषि को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय समृद्धि की दिशा में अग्रसर कर रहा है।”

इस अवसर पर माननीय कुलपति, डॉ. डी. आर. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत की प्रशासनिक एकता को जिस कुशलता से साकार किया, वह आज के शासन-प्रशासन के लिए अनुकरणीय है। कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका भी इसी भावना के अनुरूप है, जहां अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार के माध्यम से ग्रामीण भारत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी सशक्तिकरण से जोड़ा जा रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय ‘विज्ञान आधारित कृषि और किसान केंद्रित विकास’ के माध्यम से सरदार पटेल के सपनों के भारत की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।”

कार्यक्रम में डॉ. ए. के. साह (अधिष्ठाता, कृषि संकाय), डॉ. फ़ेज़ा अहमद (निदेशक, बीज एवं फार्म), उप निदेशक अनुसंधान, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने सक्रिय रूप से कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘राष्ट्रीय एकता शपथ’ ली और यह संकल्प लिया कि वे कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार की समन्वित शक्ति के माध्यम से राष्ट्र की एकता, समृद्धि और आत्मनिर्भरता में योगदान देंगे।

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