



भागलपुर में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे ने स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड की पुनः जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन (Intervention Application) दायर किया गया है। यह आवेदन CRL. M.A. 32334/2025 के तहत, CRL.A.-91/2015 में दाखिल किया गया है।
श्री चौबे ने कहा कि स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा एक प्रखर नेता और जनसेवक थे, जिन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे प्रथम, द्वितीय और पाँचवीं लोकसभा के सदस्य रहे तथा राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवा दी। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने योजना, श्रम, रोजगार, गृह और वित्त मंत्रालयों में कई जिम्मेदार पदों पर कार्य किया। 1973 में उन्हें भारत का रेल मंत्री बनाया गया था।
उन्होंने बताया कि 2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर ब्रॉड गेज रेलवे लाइन के उद्घाटन के दौरान ललित नारायण मिश्रा पर ग्रेनेड हमला हुआ, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। इस हमले में बिहार विधान परिषद के सदस्य सूर्य नारायण झा और रेलवे कर्मचारी राम किशोर प्रसाद सिंह की भी मृत्यु हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। इस घटना की प्रारंभिक जांच बिहार पुलिस ने की, बाद में इसे सीआईडी और तत्पश्चात सीबीआई को सौंप दिया गया।
अश्विनी चौबे ने कहा कि न्यायमूर्ति वी.एम. तारकुंडे की 1979 की रिपोर्ट और बिहार पुलिस की सीआईडी रिपोर्ट (1978) दोनों में हत्या के पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश की बात कही गई है। “किसने एल.एन. मिश्रा की हत्या की?” शीर्षक वाली इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट और पुस्तक में भी इस षड्यंत्र का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

उन्होंने कहा कि उस समय के तत्कालीन डीआईजी (सीआईडी) श्री एस.बी. सहाय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर हलफनामे में भी यह स्वीकार किया गया है कि इस मामले को दबाने की कोशिश की गई। शुरुआती जांच में जिन लोगों को गिरफ्तार कर उनका इकबालिया बयान लिया गया था, बाद में उन पर कार्रवाई न कर अन्य लोगों को आरोपी बना दिया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौबे ने कहा कि 26 मार्च 1975 की संसदीय कार्यवाही में तत्कालीन गृह मंत्री ब्रह्मानंद रेड्डी ने जिन आरोपियों के नाम सदन में बताए थे, वे सीबीआई की बाद की रिपोर्ट से मेल नहीं खाते, जिससे जांच की दिशा पर गंभीर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं ने भी उस समय इस मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग की थी, परंतु राजनीतिक दबाव के कारण सत्य को दबा दिया गया।
श्री चौबे ने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, ताकि बिहार और मिथिलांचल की जनता को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को है, और उन्हें आशा है कि ललित बाबू के परिवार को शीघ्र न्याय मिलेगा।
















