


नवगछिया। अनुमंडल मुख्यालय स्थित मैदान में शनिवार से लगातार कौवों के मृत शरीर मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मैदान के चारों ओर कौवों के शव बिखरे पड़े मिले हैं, जबकि कई कौवे तड़पते और बेहोशी की हालत में मिले हैं । इस भयावह दृश्य ने आम लोगों में दहशत और चिंता दोनों बढ़ा दी है।
रविवार सुबह क्रिकेट खेलने पहुंचे खिलाड़ियों की नजर जब मैदान में पड़े कौवों पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत स्थानीय लोगों को सूचना दी। इसके बाद खिलाड़ियों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर बचाव कार्य शुरू किया। करीब छह कौवों को बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन एक कौवे की मौके पर ही तड़पते हुए मौत हो गई। एक कौवा गंभीर रूप से घायल पाया गया, जबकि चार कौवे बेहोशी की हालत में मिले।

सूचना मिलने पर वन विभाग के पदाधिकारी राजीव कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सभी जीवित कौवों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए सुंदरवन, भागलपुर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, मृत कौवों के शवों को भी एकत्र कर जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
वन विभाग पदाधिकारी राजीव कुमार ने कहा कि फिलहाल कौवों की मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी।
इधर, बायोडायवर्सिटी एक्सपर्ट दीपक कुमार ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने आशंका जताई कि आसपास के पोखरों या खेतों में किसी जहरीले रसायन का उपयोग किया गया होगा, जिससे पानी दूषित हो गया और उसे पीने या उसमें नहाने के दौरान कौवों ने जहरीला पदार्थ ग्रहण कर लिया।
दीपक कुमार ने बताया कि जब पोखर खाली किए जाते हैं या खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव होता है, तब कई बार जहरीले रसायन पानी में मिल जाते हैं। कौवे स्वभाव से पानी देखकर तुरंत उतर जाते हैं, जिससे वे जहरीले पानी के संपर्क में आ जाते हैं और कुछ ही देर में तड़पने लगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी की कड़ाके की ठंड में पक्षियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर हो जाती है। भोजन और स्वच्छ पानी की कमी के बीच यदि वे जहरीले पदार्थ के संपर्क में आ जाएं, तो उनके बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
अनुमंडल मैदान में इस तरह सैकड़ों कौवों की मौत ने न केवल आम लोगों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
पोस्टमार्टम और लैब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौवों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या फिर किसी जहरीले रसायन के प्रभाव से। फिलहाल पूरे नवगछिया क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा और चिंता का माहौल बना हुआ है।












