



भागलपुर। भागलपुर जिला सुन्नी वक्फ बोर्ड के हालिया गठन को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने कड़ा ऐतराज जताया है। गुरुवार को महानगर जदयू कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि वक्फ जैसी संवेदनशील संस्था में जानबूझकर राजद–कांग्रेस समर्थकों और जदयू विरोधी तत्वों को शामिल कर राजनीतिक कब्जा जमाने की कोशिश की गई है।

जदयू अल्पसंख्यक नेताओं ने कहा कि यह गठन नियमों की अनदेखी और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का परिणाम है। वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष कर रहे अल्पसंख्यक नेताओं को बाहर रखकर चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को जिम्मेदारी देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
प्रदेश महासचिव महबूब आलम ने कहा कि वक्फ बोर्ड का मौजूदा स्वरूप न तो पार्टी के हित में है और न ही समाज के। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस कमिटी को तत्काल भंग कर पुनर्गठन नहीं किया गया, तो जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष शाबान खान ने इस निर्णय को संगठन के साथ विश्वासघात बताया, जबकि पूर्व प्रदेश महासचिव शमीम रिजवी ने कमिटी गठन को व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित करार दिया। प्रदेश सचिव मुमताज आलम ने कहा कि समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पार्टी विरोधियों को आगे बढ़ाना कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने वाला कदम है।

प्रखंड अध्यक्ष फजीर अंसारी (कहलगांव) और कहकशां खातून (शाहकुंड) ने भी कमिटी के पुनर्गठन की मांग दोहराते हुए कहा कि महिलाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बिना कोई भी कमिटी प्रतिनिधिक नहीं हो सकती।

महानगर जदयू जिला अध्यक्ष संजय साह ने बताया कि पूरे मामले से पार्टी नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है और जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल पटना जाकर शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेगा।
प्रेस वार्ता में अजमल अशरफी, फरीद-उल-जमा, नमेतुल्लाह सहित बड़ी संख्या में जदयू अल्पसंख्यक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।













