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भागलपुर के साहेबगंज में निर्मित 45 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अब पूरी तरह कार्य करने लगा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत बने इस अत्याधुनिक प्लांट के संचालन से गंगा नदी को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

प्लांट का निरीक्षण भागलपुर नगर निगम की मेयर डॉ. वसुंधरा लाल तथा बुडको के अधिकारी राजेश कुमार ने किया। इस दौरान उन्होंने प्लांट की कार्यप्रणाली और शोधन प्रक्रिया का जायजा लिया।

मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने बताया कि प्रयागराज के बाद भागलपुर में नमामि गंगे के तहत यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। वर्तमान में सूर्यलोक कॉलोनी, अलीगंज और टीएमबीयू पंपिंग स्टेशन से आने वाले नालों के गंदे पानी को इस प्लांट में शुद्ध किया जा रहा है। यहां गंदा पानी कई चरणों से गुजरता है, जिसमें पहले ठोस कचरे को अलग किया जाता है और फिर सूक्ष्मजीवों की मदद से पानी को स्वच्छ बनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि 15 फरवरी तक जल गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला पूरी तरह चालू हो जाएगी। प्लांट के शुरू होने से अब शहरी इलाकों का गंदा पानी सीधे गंगा में नहीं जाएगा, जिससे नदी प्रदूषण के साथ-साथ बदबू, मच्छर और जलजनित बीमारियों पर भी प्रभावी नियंत्रण होगा।

आने वाले समय में शहर के अन्य पंपिंग स्टेशनों को भी इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही प्लांट से निकलने वाले कचरे से मिथेन गैस का उत्पादन कर लगभग 300 केवीए बिजली तैयार की जाएगी, जिससे प्लांट का संचालन किया जाएगा।

मेयर ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह योजना गंगा संरक्षण और स्वच्छ भागलपुर की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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