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संविधान, नागरिकता व वोट के अधिकार पर हमले के खिलाफ जनप्रतिरोध तेज करने का लिया संकल्प

नवगछिया : संविधान, नागरिकता और वोट के अधिकार पर हमले के खिलाफ जनप्रतिरोध तेज करने के संकल्प के साथ सोमवार को देशभर में भाकपा-माले के संस्थापक महासचिव कॉमरेड चारु मजूमदार की 54वीं शहादत दिवस मनायी गयी। इस अवसर पर स्थानीय सुरखीकल स्थित यूनियन कार्यालय में पार्टी नेताओं –  कार्यकर्ताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन के महान शिल्पकार कॉमरेड चारु मजूमदार की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उनके अधूरे क्रांतिकारी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए खुद को पुनः समर्पित किया और वाम – जनवादी आन्दोलन के तमाम शहीदों व दिवंगतों की याद में दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकपा-माले के नगर सचिव विष्णु कुमार मंडल ने किया।

कार्यक्रम को पूर्व नगर सचिव सुरेश प्रसाद साह, छात्र नेता प्रवीण कुशवाहा, करण कुमार, नगर कमिटी सदस्य अमित गुप्ता व नसरतखानी ब्रांच सचिव लूटन तांती ने सम्बोधित किया।
पार्टी नगर सचिव विष्णु कुमार मंडल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस समय बिहार में वोटबंदी का एक अभूतपूर्व हमला चल रहा है, जो लाखों लोगों से मताधिकार छीन लेने की साजिश है और हमारे संविधान की बुनियाद — सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार — को सीमित और चुनिंदा बना देने का खतरा पैदा कर रहा है। महाराष्ट्र में हमने एक बुरी तरह से धांधली भरे चुनाव का सामना किया, जहां धांधली का तरीका और पैमाना चुनाव के खत्म होने और नतीजों की चोरी के बाद ही सामने आया। लेकिन बिहार में यह सब कुछ हमारी आंखों के सामने हो रहा है। ऐसे में मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया को बचाना अब जन-प्रतिरोध का सबसे जरूरी एजेंडा बन चुका है।


पूर्व नगर सचिव सुरेश प्रसाद साह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत बिहार से हुई है और अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी है। इसे संविधान, नागरिकता और वोट के अधिकार पर सबसे बड़े हमले के रूप में चिन्हित कर, देशव्यापी प्रतिरोध खड़ा करना होगा। जहां बिहार में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ का हमला जारी है, वहीं पश्चिम बंगाल के प्रवासी मज़दूरों को भाजपा शासित राज्यों में अवैध बांग्लादेशी बताकर व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है, मारा-पीटा जा रहा है और अपमानित किया जा रहा है। असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मुस्लिमों, हाशिए पर पड़े समुदायों और गरीबों के खिलाफ बड़े पैमाने पर बुलडोज़र अभियान चल रहे हैं। 9 जुलाई की अखिल भारतीय हड़ताल में दिखी मज़दूर – किसान एकता की ताक़त को अब इस फासीवादी हमले के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में बदलना होगा। आज पूरा देश बिहार की ओर देख रहा है — कि वह मोदी सरकार की इस तानाशाही को कैसे करारा जवाब देता है!

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