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भागलपुर। ममलखा पंचायत के चायचक और मसाड़ु गांव में गंगा नदी का लगातार हो रहा भीषण कटाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। कटाव के कारण कई घर गंगा में समा चुके हैं और सैकड़ों लोग बेघर होने की कगार पर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार ने आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, जबकि जमीन हर दिन गंगा में समाती जा रही है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। न तो सुरक्षित आश्रय शेष है, न ही रात में चैन की नींद नसीब हो रही है।

आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र गंगा कटाव रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे आगामी चुनावों में वोट का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे अपने मताधिकार का उपयोग नहीं करेंगे।

ग्रामीणों की यह पीड़ा अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन चुकी है। गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षित आवास की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और उम्मीद जताई है कि सरकार इस गंभीर स्थिति को नजरअंदाज नहीं करेगी।

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