


स्वामी आगमानंद जी महाराज के आगमन से भक्तिमय हुआ वातावरण
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, गुरुदेव के आशीर्वचन सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
नवगछिया । सेवा, आध्यात्म और मानवता को समर्पित संस्था सेवा श्री नवगछिया के लिए शनिवार का दिन अत्यंत गौरवपूर्ण, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से यादगार रहा। संस्था द्वारा लगातार 15 शनिवारों से संचालित सेवा एवं धर्मकार्य के क्रम में 16वें शनिवार को परम पूज्य स्वामी आगमानंद जी महाराज का पावन आगमन हुआ। गुरुदेव की उपस्थिति से पूरा कार्यक्रम स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया और श्रद्धालुओं में उत्साह का विशेष संचार देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य स्वामी आगमानंद जी महाराज, सुविख्यात भजन सम्राट हिमांशु मिश्र दीपक, वैदिक कौशलेन्द्र मिश्रा, कुंदन बाबा ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना एवं भक्ति गीतों के माध्यम से गुरुदेव का स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा एवं बुजुर्ग श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अपने आशीर्वचन में स्वामी आगमानंद जी महाराज ने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के लिए जीना नहीं, बल्कि समाज और जरूरतमंदों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है। गुरुदेव ने समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।
गुरुदेव के प्रेरणादायी विचारों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार इतने निकट से गुरुदेव के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरुदेव से व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आयोजन को सफल बनाने के लिए सेवा श्री नवगछिया के कार्यकर्ता सुबह से ही व्यवस्था में जुटे रहे।
कार्यक्रम के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। महाप्रसाद वितरण के दौरान अनुशासन एवं व्यवस्था की विशेष सराहना की गई।
सेवा श्री नवगछिया के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था पिछले कई महीनों से नियमित रूप से सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों का संचालन कर रही है। संस्था का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को सेवा और संस्कार से जोड़ना तथा मानवता की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य जारी रहेगा।
संस्था के सदस्यों ने कहा कि सेवा श्री केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक अभियान है। लोगों का बढ़ता सहयोग और विश्वास संस्था को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे सेवा, सद्भाव और मानवता के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे तथा समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
“सेवा ही धर्म है, सेवा ही साधना है” के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में गुरुदेव के आशीर्वचनों की अमिट छाप छोड़ गया।
कार्यक्रम में डॉ दीपक कुमार, राजेश कुमार झा, सुमित भगत, श्रीजीत सुंदरम, मोनू कुमार, अमर शर्मा, अमन शर्मा, सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे ।
















