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भागलपुर । बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में विशेष उत्पाद न्यायालय-2, भागलपुर ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के साधारण कारावास एवं एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का भी आदेश दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विशेष उत्पाद न्यायालय-2, भागलपुर के अनन्य विशेष उत्पाद न्यायाधीश सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-12 श्री शिव कुमार शर्मा ने मधुसूदनपुर थाना कांड संख्या-152/2024 एवं विशेष उत्पाद वाद संख्या-3556/2024 में सुनवाई करते हुए अभियुक्त जीवन चौधरी को बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 30(ए) के तहत दोषी पाया।

बताया गया कि 15 जून 2026 को न्यायालय द्वारा अभियुक्त को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद 17 जून 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने उसे पांच वर्ष के साधारण कारावास तथा एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

अभियोजन के अनुसार 22 सितंबर 2024 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अभियुक्त अपने घर से अवैध शराब का कारोबार कर रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी की। पुलिस को देखते ही अभियुक्त एक बोतल हाथ में लेकर भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन पुलिस बल ने उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 8 लीटर देसी शराब बरामद की गई। इसके बाद बरामद शराब को जब्त कर प्राथमिकी दर्ज की गई और अनुसंधान शुरू किया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके विरुद्ध पूर्व में भी तीन मामले दर्ज हैं। नाथनगर (मधुसूदनपुर) थाना कांड संख्या-270/2022 में उसके घर से 10 लीटर ताड़ी बरामद की गई थी। वहीं थाना कांड संख्या-33/2020 में उसके घर के नीचे रखे प्लास्टिक के गैलन से 3.5 लीटर देसी शराब बरामद हुई थी। इसके अलावा थाना कांड संख्या-206/2016 भी उसके विरुद्ध दर्ज मामलों में शामिल है।

अनुसंधान पूर्ण होने के बाद पुलिस द्वारा आरोप-पत्र समर्पित किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध पाया और उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक भोला कुमार मंडल ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उनके सहयोगी अधिवक्ता राजेंद्र कुमार, रविरंजन कुमार, पिंटू कुमार सिंह एवं राज तिलक कुश ने भी न्यायालय में अभियोजन पक्ष का सहयोग किया।

न्यायालय के इस फैसले को बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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