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परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

डॉक्टर की जगह नर्स द्वारा प्रसव कराने का आरोप, अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों के बयानों में विरोधाभास

भागलपुर के नाथनगर रेफरल अस्पताल में प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृत नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया है कि चिकित्सक की अनुपस्थिति में नर्स द्वारा प्रसव कराया गया, जिसके कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया और परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार बिहारीपुर निवासी पूजा कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार सुबह नाथनगर रेफरल अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब सात बजे अस्पताल पहुंचने के बाद नर्सों ने जांच तो की, लेकिन मरीज का विधिवत पंजीकरण और आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई।

परिजनों के मुताबिक प्रसव पीड़ा बढ़ने पर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक को बुलाने के बजाय नर्सों ने स्वयं प्रसव कराया। आरोप है कि प्रसव के दौरान नर्स ने अत्यधिक दबाव का प्रयोग किया और कुछ देर बाद बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन जन्म के बाद नवजात की स्थिति बिगड़ गई तथा उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि जन्म के बाद न तो नवजात की समुचित जांच की गई और न ही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

मामले को लेकर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. अन्वेषा ने अपनी सफाई में कहा कि वह प्रसव कक्ष में दो बार गई थीं और वहां मौजूद नर्सों से मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी ली थी, लेकिन उन्हें संबंधित मरीज के बारे में कुछ नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि प्रसव हो जाने और नवजात की स्थिति गंभीर होने के लगभग 40 मिनट बाद उन्हें इसकी जानकारी दी गई।

डॉ. अन्वेषा के अनुसार यदि मरीज की स्थिति के बारे में समय रहते उन्हें सूचित किया जाता तो आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी ड्यूटी सुबह आठ बजे से थी और रात की ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों द्वारा भी मरीज के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

वहीं अस्पताल प्रभारी डॉ. अनुपमा सहाय ने घटना को लेकर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मरीज का अस्पताल में विधिवत भर्ती पंजीकरण नहीं हुआ था और वह किसी अन्य कमरे में बैठी हुई थी। उनके अनुसार मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी तथा प्रसव के समय बच्ची मृत अवस्था में थी। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया किसी चिकित्सक या नर्स की लापरवाही प्रतीत नहीं होती है।

हालांकि अस्पताल प्रभारी और परिजनों के बयानों में कई बिंदुओं पर विरोधाभास सामने आया है। परिजन जहां सुबह सात बजे अस्पताल पहुंचने और उपचार में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन मरीज के समय पर भर्ती नहीं होने की बात कह रहा है।

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल नवजात की मौत को लेकर अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों और परिजनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है तथा पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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