


नवगछिया। राघोपुर गंगा क्षेत्र में हुए नाव हादसे को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन लापता दो लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। गंगा की तेज धार और उफनती लहरों के बीच एनडीआरएफ की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी है। वहीं, अपनों की तलाश में परिजन भी अपनी नाव लेकर गंगा की धार में भटक रहे हैं। हर सुबह आंखों में उम्मीद लेकर घर से निकलते हैं और शाम को खाली नाव लेकर लौटते हैं। चार दिनों से यही सिलसिला जारी है, लेकिन अब तक अपनों की कोई खबर नहीं मिली है।

लोदीपुर निवासी सटवन कुमार की आवाज में अपनों को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने बताया कि बादल कुमार 26 अगस्त से लापता हैं। परिवार के लोग बटेश्वर, कुरसेला और करागोला तक नाव लेकर उनकी तलाश कर चुके हैं। गंगा की लहरों से लेकर किनारे तक हर जगह खोजबीन की गई, लेकिन बादल का कोई पता नहीं चला। सटवन कुमार ने बताया कि प्रशासन की टीम करीब 12 किलोमीटर के क्षेत्र में तलाश कर लौट आती है, जबकि परिजन उम्मीद के सहारे इससे आगे तक खुद नाव लेकर खोजबीन करते हैं। परिवार को अब भी भरोसा है कि शायद बादल किसी किनारे पर मिल जाएं।
स्थानीय ग्रामीण अखिलेश मंडल ने हादसे में लापता दोनों लोगों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि हादसे के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा न हो।
आजाद हिंद मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने कहा कि बाढ़ का खतरा पहले से दिखाई दे रहा था। समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो शायद यह स्थिति नहीं आती। उन्होंने कहा कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों के घर उजड़ रहे हैं और कई परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
ग्रामीण रीना देवी और शोभा देवी ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर लोग अपने घर खाली कर रहे हैं। लेकिन बारिश और बाढ़ के बीच गरीब परिवार आखिर जाएं तो जाएं कहां? बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सुरक्षित स्थान पर रहने और जरूरी सुविधाओं की चिंता भी ग्रामीणों को सता रही है।

इस संबंध में खरीक थानाध्यक्ष से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
गंगा की धार लगातार बह रही है, लेकिन लापता लोगों के परिवारों की जिंदगी जैसे थम गई है। नदी किनारे टकटकी लगाए बैठे परिजन हर गुजरती नाव को उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं। शायद किसी नाव में उनका अपना लौट रहा हो। चार दिन से आंखों में आंसू, दिल में दर्द और मन में एक ही सवाल है—आखिर हमारे अपने कब मिलेंगे?
















