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नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में सोमवार रात एक महिला अपने भतीजे को गोद में लेकर घबराई हालत में दौड़ती हुई पहुंची। रात करीब 10 बजे की यह घटना है। महिला अस्पताल परिसर में काफी परेशान दिख रही थी। बच्चे की हालत देखकर अस्पताल स्टाफ भी तुरंत सक्रिय हो गया और कारण पूछा।

महिला ने बताया कि बच्चा उसका भतीजा है, बहुत दुलारा है। ट्यूशन से लौटते समय रास्ते में एक आवारा कुत्ते ने उसे काट लिया। जैसे ही यह घटना हुई, परिवार में हड़कंप मच गया। बच्चा रोने लगा और खून बहने लगा।

अस्पताल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए चिकित्सकों को बुलाया। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे का तत्काल इलाज शुरू किया। पीड़ित बच्चे का नाम प्रशांत कुमार है, जो नारद मंडल का पुत्र है। मूल रूप से वह घोघा थाना क्षेत्र, जिला भागलपुर का निवासी है। लेकिन वर्तमान में अपनी बुआ के साथ नवगछिया के बोरवा गांव में रहकर पढ़ाई करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आए दिन किसी न किसी को काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। खासकर बच्चे अधिक शिकार हो रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन व पशुपालन विभाग जल्द से जल्द कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण करे और नियमित टीकाकरण व पकड़ने का अभियान चलाए, ताकि बच्चों और आम लोगों को राहत मिल सके।

अगर कुत्ता काट ले तो क्या करें: जानिए जरूरी सावधानियां और प्राथमिक उपचार

इन दिनों क्षेत्र में कुत्ते के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और यदि किसी को कुत्ता काट ले तो तुरंत क्या करना चाहिए, इसकी सही जानकारी हो। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्ते के काटने के मामले में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए समय पर सही कदम उठाना बहुत जरूरी है।

सबसे पहले क्या करें
अगर किसी को कुत्ता काट ले तो सबसे पहले घाव को साफ पानी और साबुन से कम-से-कम 10 मिनट तक धोना चाहिए। इससे जहर या संक्रमण फैलने की संभावना कम हो जाती है। इसके बाद किसी भी नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जाकर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

टीका लगवाना है जरूरी
कुत्ते के काटने के तुरंत बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना अनिवार्य होता है। आमतौर पर यह टीका चार से पांच खुराकों में लगाया जाता है। कुछ मामलों में, इम्यूनोग्लोब्युलिन का भी उपयोग किया जाता है जो शरीर में तत्काल प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद करता है।

कुत्ता पालतू था या आवारा, इससे फर्क पड़ता है
अगर काटने वाला कुत्ता पालतू है और उसकी रेबीज वैक्सीन की स्थिति स्पष्ट है, तब भी डॉक्टर की सलाह जरूरी है। वहीं, अगर कुत्ता आवारा है और उसके स्वास्थ्य की जानकारी नहीं है, तो खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में टीका लगवाना और भी जरूरी हो जाता है।

क्यों है रेबीज खतरनाक
रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से इंसानों में फैल सकती है। एक बार लक्षण दिखने के बाद इसका इलाज संभव नहीं है, इसलिए समय पर टीका लगवाना ही एकमात्र सुरक्षा उपाय है।

क्या न करें
कई लोग घाव पर हल्दी, मिर्च या मिट्टी लगाने जैसी घरेलू विधियों का सहारा लेते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है। इससे संक्रमण और बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी घरेलू इलाज की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ही बेहतर होता है।

जागरूकता ही बचाव
स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर रेबीज से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन आम लोगों को भी खुद सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को विशेष रूप से समझाना चाहिए कि वे आवारा कुत्तों से दूर रहें।

अगर कोई व्यक्ति कुत्ते के काटने की घटना को हल्के में लेता है, तो वह अपनी जान को खतरे में डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, लेकिन तुरंत उचित कदम उठाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।

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