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मंजूषा समर कैंप का समापन, 72 प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र

नवगछिया की ऐतिहासिक विरासत और मंजूषा कला से बच्चों को जोड़ने का प्रयास सराहनीय बोले अतिथिगण

नवगछिया। बाल भारती, पोस्ट आफिस रोड़ में बिहुला विषहरी पूजा समिति, नवगछिया विकास समिति एवं मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मंजूषा समर कैंप का समापन समारोह मंगलवार को आयोजित किया गया। समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 72 छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मंजूषा गुरु मनोज पंडित, विद्यालय के प्राचार्य कौशल जायसवाल, अधिवक्ता अजीत पांडेय, काशीकांत सिंह एवं संजय मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

इस अवसर पर मंजूषा कला, योग, ताइक्वांडो एवं अन्य गतिविधियों में प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों मनोज पंडित, स्मृति कुमारी, राजीव कुमार, घनश्याम प्रसाद, धर्मचंद्र भगत, विशाल कुमार तथा बाल भारती विद्यालय के अंश कुमार, रूद्र एवं विराट को भी सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि नवगछिया की बेटी बिहुला की कथा नारी शक्ति, साहस और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है और अपनी जन्मभूमि पर गर्व करना सीखती है।

मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान इस तरह के रचनात्मक शिविर बच्चों के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे बच्चों में स्थानीय इतिहास, कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जिला परिषद कार्यालय में भी मंजूषा कला को प्रमुखता से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा।

मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में सम्मान प्राप्त करते समय उन्हें इस बात का गर्व महसूस हुआ कि नवगछिया जैसी ऐतिहासिक भूमि से जुड़ी बिहुला की कथा और मंजूषा कला आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि यह कला केवल चित्रकला नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है।

कार्यक्रम के संयोजक मुकेश राणा ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग और सकारात्मक प्रयासों से मंजूषा कला के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नवगछिया के सार्वजनिक स्थलों पर मंजूषा पेंटिंग को स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, ताकि क्षेत्र की इस लोककला को व्यापक पहचान मिल सके।

समारोह के अंत में प्रतिभागियों और अभिभावकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।

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