


बाल विवाह, दहेज प्रथा और महिला अधिकारों पर हुई चर्चा, आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश
पूर्णिया ।
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस सुगंधा शर्मा के निर्देश पर शुक्रवार को पूर्णिया जिले के बी-कोठी प्रखंड में ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं एवं किशोरियों को सामाजिक कुरीतियों, महिला अधिकारों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं किशोरियों को बाल विवाह उन्मूलन, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, लैंगिक हिंसा, दहेज प्रथा, महिला सुरक्षा तथा कम उम्र में मातृत्व से होने वाले दुष्प्रभावों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बाल विवाह और दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए इनके उन्मूलन में समाज की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता बताई।
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बी-कोठी एवं वन स्टॉप सेंटर पूर्णिया की केंद्र प्रशासक द्वारा 181 महिला हेल्पलाइन की जानकारी दी गई तथा महिलाओं को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इस सेवा का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक, डीएचईडब्ल्यू नंदन कुमार सिंह ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन, बचत की आदत तथा सरकारी वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को नियमित बचत करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक पात्र महिलाओं का आवेदन प्राप्त कर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाए।
कार्यक्रम में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, स्वास्थ्य संबंधी विषयों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
महादलित टोला की किशोरी समूह की सदस्याओं एवं स्थानीय महिलाओं ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
मौके पर महिला पर्यवेक्षिकाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं, लेखा सहायक डीएचईडब्ल्यू, स्थानीय ग्रामीण एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
















