


टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ आर्थिक संकट में, परिवार चलाना हुआ मुश्किल
भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के एमबीए विभाग में कार्यरत टीचिंग एवं नॉन-टीचिंग कर्मी पिछले 10 महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि नियमित आय बंद होने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है तथा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित हो रही है।
विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉ. पंकज कुमार, डॉ. हारिश कुमार, ब्यूटी कुमारी, डॉ. काजी कमरान तथा कर्मचारी डॉ. आशीष कुमार झा और पंकज चौधरी ने बताया कि मानदेय भुगतान को लेकर कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन और विभागीय स्तर पर गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उनका कहना है कि लगातार 10 महीने से भुगतान नहीं होने के कारण वे आर्थिक रूप से टूट चुके हैं और कई कर्मी भुखमरी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार जब भी वे अपनी समस्या लेकर विभागीय निदेशक के पास जाते हैं, तो उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो सका है।
जानकारी के मुताबिक एमबीए विभाग की आय-व्यय, मानदेय भुगतान एवं सेवा अवधि विस्तार से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित समिति ने फरवरी माह में ही अपनी रिपोर्ट प्रभारी कुलपति को सौंप दी थी। इसके बाद मानदेय भुगतान और सेवा विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों को लेकर विभिन्न स्तरों पर विवाद और विलंब की स्थिति बनी रही।
इस संबंध में विभाग की निदेशक प्रो. निर्मला कुमारी ने स्पष्ट किया कि मानदेय भुगतान, परफॉर्मेंस रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज काफी पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से कर्मियों के लंबित मानदेय भुगतान और सेवा अवधि विस्तार को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं तथा मामले के शीघ्र समाधान की उम्मीद है।
कर्मियों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप कर लंबित मानदेय जारी करने की मांग की है।
















