


पूर्णिया। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षाविद डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि देश में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और रोजगार से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा जनहित में निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं करेगी, तब तक इसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का अत्यधिक व्यवसायीकरण हो गया है। अधिकांश विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की गतिविधियां नामांकन, परीक्षा और परिणाम तक ही सीमित होकर रह गई हैं, जबकि शोध और नवाचार की संस्कृति लगातार कमजोर होती जा रही है। विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षक नियुक्ति के बाद कम से कम तीन माह का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए तथा प्रत्येक दो वर्ष पर पुनः प्रशिक्षण आयोजित हो, ताकि शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके। साथ ही अनुभवी शिक्षकों के सुझावों और अनुभवों का सकारात्मक उपयोग शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में प्रशिक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को समुचित ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इसका असर युवाओं के भविष्य पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा डिग्री हासिल करने के बाद भी अपने करियर को लेकर दिशाहीन दिखाई देते हैं। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा का चयन करना चाहिए तथा उसी क्षेत्र में मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
डॉ. सिंह ने केंद्र सरकार से शिक्षा को ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाया जाए, तो भारत शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।
















