


प्रदीप विद्रोही
नवगछिया। राघोपुर में गंगा ने तटबंध तोड़ा तो सोमवार को सरकार की नजर भी इलाके पर पहुंची। परबत्ता थाना क्षेत्र के राघोपुर गंगा क्षेत्र में करीब 70 मीटर तटबंध ध्वस्त होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हवाई सर्वेक्षण कर कटाव और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पुल का भी निरीक्षण किया। तटबंध टूटने के बाद प्रशासन और पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है।

लेकिन मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण के बीच तटबंध की जमीनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी तेज हो गए हैं। तटबंध टूटने से खरीक प्रखंड के दक्षिणी हिस्से में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गंगा का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे हजारों लोगों पर संकट मंडरा रहा है।
पूर्व सांसद अनिल यादव ने सरकार और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और तटबंध पर दबाव बन रहा था, तब समय रहते मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले एनडीए बैठक के नाम पर ठेकेदारों के साथ बैठक हो रही थी। ऐसे में सवाल है कि बढ़ते जलस्तर और तटबंध की कमजोर स्थिति को देखने के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। उनका आरोप है कि यदि समय रहते तटबंध की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाता तो शायद हालात इतने नहीं बिगड़ते।
सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल:
पूर्व सांसद ने तटबंध की सुरक्षा के नाम पर किए गए कार्यों की गुणवत्ता की जांच की मांग की है। उन्होंने स्थानीय लोगों के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा कार्यों में बालू की जगह मिट्टी और बोरों के सहारे काम चलाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा कार्यों में मानकों की अनदेखी हुई है तो इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। सिर्फ तटबंध टूटने के बाद राहत और बचाव शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि तटबंध टूटने की नौबत आखिर आई क्यों।
पूर्व सांसद ने मांगा पूरा हिसाब:
अनिल यादव ने सरकार से तटबंध सुरक्षा कार्यों का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि सुरक्षा कार्यों के लिए कितनी राशि आवंटित की गई थी, कितने काम का दावा किया गया, कितना भुगतान हुआ और काम की गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की।

उन्होंने कहा कि बाढ़ आने के बाद नुकसान का आकलन करने से पहले उन सवालों का जवाब जरूरी है, जो तटबंध टूटने से पहले ही खड़े हो चुके थे। फिलहाल राघोपुर तटबंध टूटने के बाद सबसे बड़ी चुनौती पानी को रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में आगे बढ़ने से रोकना तथा प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है। प्रशासन के सामने राहत-बचाव के साथ-साथ तटबंध की मरम्मत और शेष हिस्से को सुरक्षित रखने की दोहरी चुनौती है।
















