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@ 29 जुलाई को प्रस्तावित उद्घाटन से पहले मेला क्षेत्र में अधूरे निर्माण, पीएचईडी की सुस्त रफ्तार और रिवर फ्रंट की खुली खुदाई बढ़ा रही चिंता।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के औपचारिक उद्घाटन में अब महज कुछ दिन शेष हैं। संभावना है कि लंबे अंतराल के बाद इस बार मुख्यमंत्री स्वयं मेले का उद्घाटन करें। लेकिन जमीनी हकीकत यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या करोड़ों श्रद्धालुओं का यह आस्था महापर्व अधूरी तैयारियों के बीच शुरू होगा?
जिला प्रशासन ने सभी विभागों को 10 जुलाई तक तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन मेला क्षेत्र का दौरा करने पर तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। शहरी मेला क्षेत्र से लेकर कच्चा कांवरिया पथ तक कई जरूरी कार्य अधूरे हैं। वहीं, श्रावणी यात्रा शुरू होने से पहले ही हजारों कांवरिया अजगैवीनाथ धाम से गंगाजल लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो चुके हैं।
सबसे गंभीर चिंता निर्माणाधीन गंगा रिवर फ्रंट को लेकर है। कृष्णगढ़ गंगा घाट से नई सीढ़ी घाट तक 126 करोड़ रुपये की परियोजना पिछले 15 महीनों से ठप पड़ी है। निर्माण के लिए खोदे गए गहरे गड्ढों की अब तक समुचित घेराबंदी नहीं की गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के दौरान दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछले वर्ष पूरे कार्यस्थल की बैरिकेडिंग कराई गई थी, लेकिन इस बार अब तक ऐसी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।
कांवरियों की बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा: संभालने वाला पीएचईडी विभाग भी पूरी तरह तैयार नहीं दिख रहा। कई स्थानों पर शौचालय निर्माण अधूरा है, कहीं केवल रंग-रोगन हुआ है तो कहीं पैन और कमोड तक नहीं लगाए गए हैं। प्याऊ बने हैं, लेकिन अधिकांश में पानी की टोटी नहीं लगी है। नतीजतन, श्रद्धालुओं को बोतलबंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
बिजली विभाग ने जरूर तैयारियों में तेजी दिखाई है। अधिकारियों के अनुसार मेला क्षेत्र के ट्रांसफार्मरों का मेंटेनेंस लगभग पूरा हो चुका है और अस्थायी दुकानदारों के लिए 25 से 30 जुलाई तक बिजली कनेक्शन देने हेतु विशेष काउंटर खोले जाएंगे। बिजली के पोलों पर ड्राई इलेक्ट्रिक पेंट लगाया जा रहा है तथा तारों से पेड़ों की टहनियां हटाई जा चुकी हैं।
श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा सबसे बड़ा प्रशासनिक दायित्व भी है। ऐसे में उद्घाटन की तारीख नजदीक आने के बावजूद अधूरे इंतजाम प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शेष दिनों में सभी विभाग अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर पाएंगे, या फिर इस बार भी आस्था का महापर्व अधूरी तैयारियों के साये में शुरू होगा?

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