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इतिहास: बिहपुर प्रखंड के रेलवे ईंजीनियरींग दुर्गा मंदिर के प्रति क्षेत्र के लोगों में अपार श्रद्धा है।करीब सौ वर्ष पुराने यहां के पूजा वाले इस मंदिर में भगवती की पूजा व अारती में बंग्ला संस्कृति की झलक दिखती है।पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत सहायक मंडल कार्यालय बिहपुर की निगरानी व संयोजन में यहां पूजन कार्य संपादित होता है।इस मंदिर में मातारानी को खिचड़ी-सब्जी का भोग लगता है।जबकि पहली पूजा से ही बंग्ला ढाक को बजाकर माता का जागरण हाेता है।पूजा व मेला व्यवस्था में पंसस अमन आनन्द,बाला जी,अविनाश,अंकित,अंशु,सूरज,घनश्याम,निरंजन,राहुल,रवि राहुल,सानू उर्फ रोहन, आदित्य राज आदि समेत बिहपुर के पूरी युवाओं की टोली अपने कमेटी के मार्गदर्शन में जुटी हुई हैl

महाआरती में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़
अष्टमी से दसवीं पूजा तक मातारानी की संध्या महाआरती श्रद्धालू बंग्ला ढाक की थाप पर थिरकते हुए करते हैं।इस महाअराती को करने व इसे दंखने हजारों की संख्या में महिला व पुरूष अष्टमी से दसवीं पूजा तक शाम से रात तक मंदिर में जमा रहते हैं।

क्या कहते प्रधान पुजारी
मंदिर के प्रधान पुजारी मृत्युंजय मिश्रा कहते हैं कि यहां प्रतिमा विसर्जन के पूर्व महिलाएं झुंड में एक दूसरे के चेहरे पर बंग्ला परंपरानुसार सिंदूर लगाकर व मातारानी को खोईछा देकर विदा करती हैं।इस बार मातारानी का आगमन हाथी और गमन मुर्गा पर है।

क्या कहते है सहायक पुजारी
मदिर के सहायक पुजारी जयंत कुमार शर्मा कहते हैं कि 24 अक्टूबर:विजयादशमी,अपराजिता पूजन,खोईछा पूजन जयंतीग्रहण व नीलकंठ दर्शन होगा।जबकि इस मंदिर की प्रतिमा का विसर्जन 25 अक्टूबर को शाम पांच बजे बिहपुर के थानाघाट सरोवर में होगा।

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