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पूर्णिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य इन्तेखाब आलम ने देशवासियों से राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था की मजबूती के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश सामाजिक सौहार्द, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान की मूल भावना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और उसके आदर्शों को पुनः स्मरण करने की आवश्यकता है।

इन्तेखाब आलम ने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सहित लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने त्याग, संघर्ष और बलिदान से देश को आज़ादी दिलाई। स्वतंत्रता आंदोलन केवल विदेशी शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव, धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का भी अभियान था।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े परिवारों, विचारधाराओं और राजनीतिक परंपराओं ने देश की लोकतांत्रिक एवं समावेशी पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज आवश्यकता है कि उन मूल्यों में विश्वास रखने वाले सभी लोग, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल में हों या सक्रिय राजनीति से दूर हों, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एक साझा उद्देश्य के लिए आगे आएं।

इन्तेखाब आलम ने कहा कि समय के साथ अनेक नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस तथा उससे जुड़े वैचारिक परिवार से अलग होकर विभिन्न राजनीतिक दलों में चले गए, लेकिन उनकी वैचारिक जड़ें स्वतंत्रता आंदोलन और उसके मूल सिद्धांतों से जुड़ी रही हैं। देश के सामने मौजूद चुनौतियों को देखते हुए लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता में विश्वास रखने वाली सभी शक्तियों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न है। इतिहास गवाह है कि जब-जब राष्ट्र चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरा है, तब-तब लोगों ने व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। आज भी देश उसी भावना और संकल्प की अपेक्षा कर रहा है।

इन्तेखाब आलम ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें ऐसा भारत दिया जो विविधता में एकता, भाईचारे, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। इन मूल्यों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से विभाजन और वैमनस्य की राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राष्ट्रीय एकता के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने का है। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़े सभी लोगों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक विचारधारा में विश्वास रखने वाली शक्तियों को देशहित में एक मंच पर आने की आवश्यकता है।

अंत में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत, समावेशी और संवेदनशील राष्ट्र देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। यही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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