


प्रदीप विद्रोही
भागलपु। दिल्ली की राजनीति में एक समय अहम चेहरा रहे पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर एक बार फिर अपने कथित फर्जी लॉ डिग्री मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) से जुड़े बहुचर्चित डिग्री विवाद में मंगलवार को दिल्ली की साकेत कोर्ट में हुई सुनवाई ने मामले को नया मोड़ दे दिया। अदालत ने न सिर्फ दस्तावेजों के सत्यापन को गंभीरता से लिया, बल्कि संबंधित सभी विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड की गहन जांच कराने के संकेत भी दिए हैं।
सुनवाई के दौरान टीएमबीयू के पूर्व कॉलेज इंस्पेक्टर डॉ. मनींद्र कुमार सिंह गवाही देने के लिए अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक है और इतने कम समय में सभी अभिलेखों का पूरी तरह सत्यापन कर पाना संभव नहीं है। उन्होंने अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।
अदालत ने उनकी दलील को स्वीकार करते हुए आवश्यक समय प्रदान किया और मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई निर्धारित कर दी। इस दौरान जितेंद्र सिंह तोमर के अधिवक्ता भी अदालत में मौजूद रहे।
सिर्फ एक डिग्री नहीं, कई विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में जुड़े सभी विश्वविद्यालयों के दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन कराया जाएगा। जांच का दायरा केवल टीएमबीयू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी संस्थानों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे, जिनके दस्तावेज नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए थे।
जानकारी के अनुसार, जितेंद्र तोमर ने अपना नामांकन मुंगेर विश्वविद्यालय के वीएस इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में दर्शाया था, जो उस समय टीएमबीयू से संबद्ध कॉलेज था। वहीं नामांकन में प्रयुक्त शैक्षणिक प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश के फैजाबाद विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से जारी बताए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा है।
जांच अंतिम चरण में, 3 जुलाई की सुनवाई अहम
कई वर्षों से लंबित इस हाईप्रोफाइल मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। अदालत द्वारा दस्तावेजों के व्यापक सत्यापन के निर्देश के बाद 3 जुलाई की अगली सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन जांच की प्रगति और दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़े तथ्यों पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।















