


शोध के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों का किया अवलोकन
पूर्णिया । भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटाइजेशन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में पूर्णिया जिला अभिलेखागार में महत्वपूर्ण पहल जारी है। इसी क्रम में शनिवार को नव नालंदा महाविहार से पांडुलिपि सर्वेक्षण के लिए आए सहायक प्राध्यापकों की एक टीम ने जिला अभिलेखागार, पूर्णिया का दौरा कर यहां संरक्षित अभिलेखों एवं पांडुलिपियों का विस्तृत अवलोकन किया।
जिलाधिकारी अंशुल कुमार (भा.प्र.से.) के निर्देश के आलोक में संचालित इस प्रक्रिया के तहत सर्वेक्षण दल में शामिल सहायक प्राध्यापक डॉ. रूपनारायण भैना, डॉ. तापस सरकार एवं डॉ. आलोक मिश्रा ने जिला समाहरणालय स्थित अभिलेखागार पहुंचकर जिला अभिलेखागार पदाधिकारी डॉ. जय शंकर प्रसाद से मुलाकात की तथा यहां उपलब्ध अभिलेखीय सामग्री की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर डॉ. जय शंकर प्रसाद ने टीम को बताया कि जिला अभिलेखागार से कई महत्वपूर्ण अभिलेखों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड किया गया है। उन्होंने अभिलेखों का अवलोकन कराते हुए बताया कि पोर्टल पर अपलोड अधिकांश दस्तावेज “विलेज नोट्स” के रूप में उपलब्ध हैं, जो ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और विभिन्न प्रकार के अकादमिक एवं सामाजिक शोध कार्यों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन अभिलेखों को मिशन के दायरे में और अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।
डॉ. प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक अभिलेखों एवं पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, जिससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं इतिहासकारों को भविष्य में महत्वपूर्ण सामग्री सुलभ हो सके।
सर्वेक्षण दल के सदस्यों ने भी पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा रही ऐतिहासिक सामग्री आने वाले समय में शोध एवं अकादमिक अध्ययन के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहे इस अभियान से न केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों का संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि देश की समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
















