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संस्कृत साहित्य की अमूल्य धरोहर भी हुई चिन्हित

सहरसा । भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम मिशन’ परियोजना के अंतर्गत सहरसा जिले में चलाए जा रहे प्राचीन पांडुलिपि सर्वेक्षण एवं संकलन अभियान के प्रथम चरण का सफल समापन 15 जून को हो गया। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत जिले में चार हजार से अधिक अति प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज किया गया है।

जिलाधिकारी दीपेश कुमार के निर्देशन एवं जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण अभियान चलाया। अभियान के अंतिम दिन जिले के तीन अलग-अलग स्थानों से एक हजार से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन कर उन्हें डिजिटल रूप से संरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा ने बताया कि सत्तर कटैया प्रखंड के पचगछिया गांव स्थित सेवानिवृत्त शिक्षक ज्ञान शंकर झा के आवास से कई महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें मिथिला और कोसी क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकसंत बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं के गायन और भक्ति साहित्य से जुड़ी अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां शामिल हैं। इसके अलावा संस्कृत भाषा, दर्शन, साहित्य एवं धार्मिक ग्रंथों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पांडुलिपियां भी चिन्हित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन साहित्यिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना के माध्यम से देशभर में बिखरी हुई दुर्लभ एवं अप्रकाशित पांडुलिपियों को खोजकर उनका डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा से परिचित हो सकें।

सहरसा जिले में इस अभियान को विशेष सफलता मिली है। जिले के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों महिषी, कहरा, चैनपुर, बनगांव, मुरादपुर, एकाढ़ सहित कई गांवों से बड़ी संख्या में प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें धार्मिक, दार्शनिक, साहित्यिक, ज्योतिष, आयुर्वेद और लोक परंपराओं से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांडुलिपियों के गहन अध्ययन, अनुवाद और प्रकाशन से न केवल सहरसा जिले की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक अनछुए पहलुओं पर भी प्रकाश पड़ेगा। यह अभियान क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और शोध कार्यों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ज्ञान भारतम मिशन के तहत चलाया गया यह अभियान सहरसा जिले की सांस्कृतिक संपदा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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