


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बिहार की सदियों पुरानी मंजूषा कला अब केवल संग्रहालयों या त्योहारों तक सीमित नहीं रह गई है। भागलपुर के नाथनगर स्थित मसकन बारारीपुर में एस.एस. टेक्सटाइल्स मिल्स एंड इंडस्ट्रीज़ परिसर में आयोजित 10 दिवसीय ‘मूल मंजूषा चित्रकला प्रशिक्षण कार्यक्रम’ ने यह साबित कर दिया कि यदि सही प्रशिक्षण और मंच मिले, तो पारंपरिक लोककला नई पीढ़ी के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकती है।
10 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में 46 प्रतिभागियों ने मंजूषा कला की बारीकियों को सीखा। प्रशिक्षण केवल रंग और रेखाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतिभागियों को बिहुला–बिषहरी लोककथा, मंजूषा कला के इतिहास, पारंपरिक प्रतीकों और चित्रांकन की विविध शैलियों से भी परिचित कराया गया।
मुख्य प्रशिक्षक हेमंत कुमार के नेतृत्व में बिहार के प्रसिद्ध मंजूषा कलाकार अनिल कुमार और अर्पणा मजूमदार ने प्रतिभागियों को पारंपरिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों की बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी और प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें कई विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता से सभी को प्रभावित किया
समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) देबज्योति मुखर्जी ने कहा कि प्रतियोगिता में तैयार किए गए मंजूषा चित्र इस बात का प्रमाण हैं कि थोड़े समय के प्रशिक्षण से भी युवा कलाकार उत्कृष्ट कृतियां तैयार कर सकते हैं। उन्होंने इसे मंजूषा कला के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
Living Looms of India परियोजना के प्रबंधक भूपेन्द्र सोनी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक लोककलाओं के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वहीं एस.एस. टेक्सटाइल्स मिल्स एंड इंडस्ट्रीज़ के कोर्स डायरेक्टर डॉ. सदानंद गुप्ता ने कहा कि मंजूषा कला बिहार की सांस्कृतिक पहचान होने के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम भी बन रही है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
विशिष्ट अतिथि अनिल कुमार ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के नियमित प्रशिक्षण से मंजूषा कला को नई पीढ़ी मिलेगी। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रशासनिक प्रभारी नंदन कुमार और समन्वयक नितेश कुमार के योगदान की भी प्रशंसा की।
समारोह के अंत में सभी 46 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और पदक देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 प्रतिभागियों—प्रिया राज, पायल कुमारी, रिया कुमारी, निभा कुमारी, प्रीति कुमारी, सीमा कुमारी, स्मृति कुमारी, रानी देवी, ऋचा कुमारी, तन्वी कुमारी, अमृता कुमारी और रागनी कुमारी—को विशेष सम्मान प्रदान किया गया

















