


आठ लोग घायल, एक की हालत गंभीर; मुआवजे की मांग को लेकर एनएच-31 जाम
नवगछिया पुलिस जिले के भवानीपुर थाना के सामने शुक्रवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में महादलित परिवार के दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। तेज रफ्तार बालू लदा एक हाइवा अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने फूंस के घर पर पलट गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। घटना से आक्रोशित लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर एनएच-31 को जाम कर दिया।
घटना शुक्रवार सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खगरिया की ओर से नवगछिया की तरफ जा रहा लाल बालू लदा हाइवा अचानक टायर फटने के कारण अनियंत्रित हो गया और एनएच-31 किनारे बसे महादलित परिवार के फूंस के घर पर पलट गया। हादसा इतना भीषण था कि घर पूरी तरह बालू और हाइवा के नीचे दब गया।
इस हादसे में नारायणपुर प्रखंड के चकरामी वार्ड संख्या-7 निवासी गुड्डू डोम के पुत्र आठ वर्षीय अंकुश कुमार तथा दस वर्षीय पुत्री राधा कुमारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दोनों सगे भाई-बहन थे। हादसे के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया।
हादसे में गुड्डू डोम (28 वर्ष), नीरज डोम (26 वर्ष), भिखारी डोम (50 वर्ष), इंदु देवी (40 वर्ष), मौसम देवी (20 वर्ष), सपना कुमारी (14 वर्ष), ममता कुमारी (12 वर्ष) तथा कारे कुमार (10 वर्ष) सहित कुल आठ लोग घायल हो गए। सभी को स्थानीय लोगों एवं पुलिस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नारायणपुर पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने इंदु देवी की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज) रेफर कर दिया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। अन्य सात घायलों का इलाज नारायणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही भवानीपुर थाना अध्यक्ष शंभु कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। क्रेन और जेसीबी की सहायता से काफी मशक्कत के बाद हाइवा और बालू के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि संबंधित महादलित परिवार कई वर्षों से भवानीपुर थाना के सामने एनएच-31 किनारे फूंस का घर बनाकर रह रहा था। परिवार के पास न रहने के लिए पक्का मकान है और न ही अपनी जमीन। मजबूरी में वे सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर जीवन-यापन कर रहे थे। हादसे में जान गंवाने वाला अंकुश परिवार का इकलौता बेटा था, जबकि उसकी एक बहन राधा भी इस दुर्घटना में काल के गाल में समा गई।
घटना से आक्रोशित महादलित समुदाय के सैकड़ों लोगों ने दोनों बच्चों के शव एनएच-31 पर रखकर सड़क जाम कर दिया और मृतक परिवार को उचित मुआवजा, सरकारी सहायता तथा दोषी चालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर नारायणपुर अंचलाधिकारी सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों द्वारा समझाने-बुझाने और सरकारी सहायता का आश्वासन देने के बाद करीब डेढ़ घंटे बाद जाम समाप्त कराया गया।
सड़क जाम के कारण एनएच-31 पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यातायात को वैकल्पिक रूप से 14 नंबर सड़क से डायवर्ट किया गया, जिससे मधुरापुर बाजार में भी घंटों जाम की स्थिति बनी रही।
भवानीपुर थाना अध्यक्ष शंभु कुमार ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को जब्त कर लिया गया है। फरार चालक की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे रहने वाले भूमिहीन एवं महादलित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास के सवाल को सामने ला दिया है।















