


पूर्णिया। जिले के बायसी प्रखंड स्थित उच्च विद्यालय बायसी में 20 एवं 21 मई को प्रारंभिक बाल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांगता जांच अनुसूची विषय पर आंगनबाड़ी सेविकाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चला।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों में विकासात्मक विलंब एवं दिव्यांगता के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि ऐसे बच्चों को समय पर उचित स्वास्थ्य दल तक भेजा जा सके और उन्हें आवश्यक उपचार एवं सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जांच सूची के माध्यम से बच्चों की जांच प्रक्रिया, विकासात्मक संकेतों की पहचान, स्वास्थ्य केंद्र भेजने की प्रक्रिया तथा निरंतर निगरानी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सेविकाओं को बताया गया कि समय पर पहचान एवं उचित उपचार से बच्चों के बेहतर विकास की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में प्रशिक्षकों ने अभिनय आधारित अभ्यास, समूह चर्चा एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सेविकाओं को जांच प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाया। साथ ही यह भी बताया गया कि नियमित घर-घर भ्रमण एवं परिवारों से संवाद के माध्यम से दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाएं समुदाय में बच्चों की पहली पहचानकर्ता होती हैं तथा उनकी सक्रिय भूमिका से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्र में नियमित जांच, समय पर स्वास्थ्य केंद्र भेजने तथा बच्चों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर बायसी प्रखंड की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी जीनत यस्मिन, महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य एवं पोषण विभाग से जुड़े अधिकारी, यूनिसेफ के राज्य सलाहकार डॉ. राघवेन्द्र कुमार, जिला पोषण सलाहकार निधि भारती, प्रारंभिक बाल विकास दल के नवल कुमार, अजय कुमार दास, अशोक कुमार यादव, सोमनाथ प्रमाणिक सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी मौजूद थे।
















