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नवगछिया। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तत्वावधान में संचालित नमामि गंगे जलज परियोजना के अंतर्गत विश्व सर्प दिवस के अवसर पर नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर प्रखंड स्थित लक्ष्मीपुर गांव में सांपों के संरक्षण एवं सर्पदंश से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में सांपों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना, जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सर्पदंश की स्थिति में सही उपचार की जानकारी देना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जलज परियोजना के सहयोगी राहुल कुमार राज ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि सांप प्रकृति की खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे मारने या परेशान करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर वन विभाग अथवा प्रशिक्षित गंगा प्रहरी रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि सांप को सुरक्षित पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।

उन्होंने बताया कि लगातार घटते वन क्षेत्र, बढ़ती आबादी और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने के कारण वन्यजीवों, विशेषकर सरीसृपों के रहने के स्थान तेजी से कम हो रहे हैं। मानसून के दौरान बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं। ऐसे समय में लोगों को घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। अधिकांश सांप विषैले नहीं होते और बिना किसी कारण मनुष्यों पर हमला नहीं करते।

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राहुल कुमार राज ने कहा कि जलज परियोजना के तहत प्रशिक्षित गंगा प्रहरी समय-समय पर सांपों एवं अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें बिना किसी नुकसान के प्राकृतिक आवास में छोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी जागरूकता और सावधानी अपनाकर हम अपनी सुरक्षा के साथ-साथ इन महत्वपूर्ण जीवों का जीवन भी बचा सकते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सर्पदंश से बचाव एवं प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी भी दी गई। बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अथवा मान्यता प्राप्त अस्पताल ले जाना चाहिए। झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध होने पर अधिकांश मरीजों का सफल उपचार संभव है।

जागरूकता अभियान के दौरान सांपों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी पहचान, पर्यावरण में उनकी उपयोगिता तथा संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। छात्रों एवं ग्रामीणों को बताया गया कि सांप खेतों में चूहों एवं अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर किसानों की अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करते हैं, इसलिए उनका संरक्षण पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा तथा सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

इस अवसर पर माया साइंस संस्थान, लक्ष्मीपुर के इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्थान के निदेशक मुकेश कुमार शर्मा ने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून एवं नमामि गंगे जलज परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम समाज में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

स्थानीय समुदाय, विद्यार्थियों एवं गंगा प्रहरियों की सक्रिय सहभागिता के साथ यह जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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