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भागलपुर । कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के संग्रहालय निदेशालय अंतर्गत भागलपुर संग्रहालय, भागलपुर में नवाचार को अपनाते हुए ‘पुस्तकालय’ की स्थापना नए स्तर से की जा रही है। भागलपुर संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1976 में की गई थी, कई मौकों पर कई विद्वानों ने संग्रहालय को कई पुस्तकें भेंट की तथा कुछ को समय-समय पर पदस्थापित संग्रहालयाध्यक्षों ने भी संकलित की। इस प्रकार भागलपुर संग्रहालय में पुस्तकों के अच्छी-खासी संख्या संग्रहित होती चली गई, किंतु अव्यवस्थित रख-रखाव से यह आमजन के लिए सहजता से उपलब्ध नहीं हो पा रही थी, तथा भागलपुर संग्रहालय के प्रथम तल के छोटे से कमरे में नामांकित ‘पुस्तकालय एवं वाचनालय’ स्वाभाविक प्रयोग में नहीं आ पा रहा था।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन के निर्देशन में भागलपुर संग्रहालय में सुव्यवस्थित पुस्तकालय बनाया जा रहा है। इसके लिए संग्रहालय में पहले से संग्रहित पुस्तकों का डॉक्युमेंटेशन किया जा रहा है। अंकित रंजन के मार्गदर्शन में तिलकामांझी, भागलपुर विश्वविद्यालय के शोधार्थी आयशा, फैसल, रोजी, आनंद और रितेश संग्रहालय के ‘वॉलेनटीयरिंग कार्यक्रम’ से जुड़कर संग्रहालय के पुस्तकालय को नवीन रूप देने का कार्य कर रहे हैं। भागलपुर संग्रहालय के नवीन पुस्तकालय को अगले सप्ताह से आम लोगों के लिए चालू कर दिया जाएगा।

जहां कोई भी विद्यार्थी अथवा शोधार्थी बैठकर पुस्तकों का अवलोकन कर सकेंगे। वर्तमान के संग्रह में यहाँ कला, साहित्य, भाषा, संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, दर्शन तथा गांधी विचार से संबंधित पुस्तकों का संग्रह किया गया है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने शहर के विद्वानों से अनुरोध किया है की यदि उनके पास भागलपुर एवं अंग प्रदेश के इतिहास, कला एवं संस्कृति से संबंधित पुस्तक हैं तो आम लोगों के अध्ययन हेतु भागलपुर संग्रहालय को दे सकते हैं। सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन ने कहा कि भागलपुर संग्रहालय निकट भविष्य में अंग प्रदेश की संस्कृति और इतिहास को जानने-समझने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन स्थल के रूप में उभर कर सबके बीच आएगा।

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