



नवगछिया : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, भागलपुर शाखा के तत्वावधान में नवगछिया में द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन अनीता दीदी के नेतृत्व में 5 फरवरी से 10 फरवरी 2026 तक श्री गोपाल गोशाला, नवगछिया परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के साथ लोगों को आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ना रहा।

कार्यक्रम के संध्या सत्र में राजयोगिनी अनीता दीदी ने “योग द्वारा सुख की प्राप्ति” विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि राजयोग की अवस्था से मानसिक एवं अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति होती है, जिसे अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस अलौकिक सुख के सामने शारीरिक इन्द्रियों के सुख तुच्छ प्रतीत होते हैं। परमात्मा से योग जुड़ने पर मन में अपार शांति, संतोष और प्रेम का भाव उत्पन्न होता है, जो आत्मा को भीतर से भर देता है।

अनीता दीदी ने कहा कि राजयोग के अभ्यास से आत्मा में पवित्रता, सुख, शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान और शक्ति का संचार होता है। निरंतर योग अभ्यास से पुराने विकारी संस्कार समाप्त होते हैं और आत्मा के संस्कार परिवर्तित होते हैं। उन्होंने योग की तुलना अग्नि से करते हुए कहा कि जैसे अग्नि से वस्तुएं पिघल जाती हैं, वैसे ही राजयोग से आत्मा के नकारात्मक संस्कार बदल जाते हैं। राजयोग से बुद्धि का ताला खुलता है और जीवन की कठिन समस्याओं का समाधान सहज रूप से मिलने लगता है।

इस अवसर पर बी.के. गुंजा दीदी ने “आत्मा और परमात्मा का निवास स्थान” विषय को स्पष्ट करते हुए कहा कि परमात्मा को परलोक का परमपिता कहा जाता है। परलोक इस भौतिक संसार से परे, सूर्य-चंद्रमा और सितारों के प्रकाश से ऊपर स्थित एक दिव्य लोक है, जिसे ब्रह्मलोक, शांति धाम या परमधाम भी कहा जाता है। यह आत्माओं और परमात्मा का निवास स्थान है। उन्होंने त्रिलोक — साकारी, सूक्ष्म और निराकार लोक की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया।
पांच दिवसीय इस आध्यात्मिक आयोजन के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का समापन “ओम शांति” संदेश के साथ किया गया।













