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जुबार टॉप पर 2 जुलाई 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए दिया था सर्वोच्च बलिदान, परिजनों ने कहा- उनका साहस और त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

नवगछिया : कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीद हवलदार रतन कुमार सिंह की पुण्यतिथि गुरुवार को उनके पैतृक गांव तिरासी स्थित शहीद स्मारक पर पूरे सम्मान, श्रद्धा और देशभक्ति के वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पूर्व सैनिकों और युवाओं ने शहीद स्मारक पहुंचकर पुष्पचक्र एवं माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में भारत माता की जय और अमर शहीद हवलदार रतन कुमार सिंह अमर रहें के उद्घोष गूंजते रहे।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान जुबार टॉप पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए हवलदार रतन कुमार सिंह ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था। 2 जुलाई 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह त्याग राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।

शहीद के बड़े पुत्र एवं शिक्षक रूपेश कुमार सिंह ने कहा कि उनके पिता का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और साहस का प्रतीक रहा। उन्होंने कहा कि परिवार को उनके बलिदान पर गर्व है। देश की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान आज भी पूरे परिवार और क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं।

उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर लड़ना ही नहीं, बल्कि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना भी सच्ची राष्ट्रसेवा है।

शहीद के पौत्र शौर्यान सिंह और आर्यन सिंह ने अपने दादा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अपने दादा की वीरगाथा सुनकर उनमें भी देशसेवा की भावना मजबूत होती है और वे भविष्य में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि कारगिल के वीर सपूतों का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। ऐसे वीर सैनिकों की बदौलत ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और नागरिक चैन की जिंदगी जी रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को शहीदों के जीवन संघर्ष, वीरता और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में सुभाष पंडित, मनोज झा, नीरज प्रताप सिंह, शंभू कुमार रजक, शंकर मंडल, राजा रौशन, आलोक, विकास, संतोष, टिंकू, राहुल, हर्षित आनंद, शंभू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पूर्व सैनिकों एवं युवाओं ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर कारगिल के अमर वीर हवलदार रतन कुमार सिंह को श्रद्धांजलि दी तथा उनके बलिदान को शत-शत नमन किया।

कारगिल के अमर वीर हवलदार रतन कुमार सिंह की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित

जुबार टॉप पर 2 जुलाई 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए दिया था सर्वोच्च बलिदान, परिजनों ने कहा- उनका साहस और त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

नवगछिया : कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीद हवलदार रतन कुमार सिंह की पुण्यतिथि गुरुवार को उनके पैतृक गांव तिरासी स्थित शहीद स्मारक पर पूरे सम्मान, श्रद्धा और देशभक्ति के वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पूर्व सैनिकों और युवाओं ने शहीद स्मारक पहुंचकर पुष्पचक्र एवं माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में भारत माता की जय और अमर शहीद हवलदार रतन कुमार सिंह अमर रहें के उद्घोष गूंजते रहे।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान जुबार टॉप पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए हवलदार रतन कुमार सिंह ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था। 2 जुलाई 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह त्याग राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।

शहीद के बड़े पुत्र एवं शिक्षक रूपेश कुमार सिंह ने कहा कि उनके पिता का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और साहस का प्रतीक रहा। उन्होंने कहा कि परिवार को उनके बलिदान पर गर्व है। देश की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान आज भी पूरे परिवार और क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं।

उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर लड़ना ही नहीं, बल्कि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना भी सच्ची राष्ट्रसेवा है।

शहीद के पौत्र शौर्यान सिंह और आर्यन सिंह ने अपने दादा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अपने दादा की वीरगाथा सुनकर उनमें भी देशसेवा की भावना मजबूत होती है और वे भविष्य में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि कारगिल के वीर सपूतों का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। ऐसे वीर सैनिकों की बदौलत ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और नागरिक चैन की जिंदगी जी रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को शहीदों के जीवन संघर्ष, वीरता और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में सुभाष पंडित, मनोज झा, नीरज प्रताप सिंह, शंभू कुमार रजक, शंकर मंडल, राजा रौशन, आलोक, विकास, संतोष, टिंकू, राहुल, हर्षित आनंद, शंभू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पूर्व सैनिकों एवं युवाओं ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर कारगिल के अमर वीर हवलदार रतन कुमार सिंह को श्रद्धांजलि दी तथा उनके बलिदान को शत-शत नमन किया।

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